आरती
श्रीमद भगवद गीता आरती (Shri Bhagavad Gita Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
श्रीमद भगवद गीता आरती श्रीमद भगवद गीता की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में श्रीमद भगवद गीता की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा विशेष पूजा के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह श्रीमद भगवद गीता आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्रीमद भगवद गीता आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्रीमद भगवद गीता आरती (पूरा पाठ)
जय भगवद् गीते,
माता जय भगवद् गीते।
हरि हिय कमल विहारिणि
सुन्दर सुपुनीते॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
कर्म सुमर्म प्रकाशिनि
कामासक्तिहरा।
तत्त्वज्ञान विकाशिनि
विद्या ब्रह्म परा॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
निश्चल भक्ति विधायिनि
निर्मल मलहारी।
शरण रहस्य प्रदायिनि
सब विधि सुखकारी॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
राग द्वेष विदारिणि
कारिणि मोद सदा।
भव भय हारिणि तारिणि
परमानन्दप्रदा॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
आसुर-भाव-विनाशिनि
नाशिनि तम रजनी।
दैवी सद्गुण दायिनि
हरि-रसिका सजनी॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
समता त्याग सिखावनि,
हरिमुख की बानी।
सकल शास्त्र की स्वामिनि,
श्रुतियों की रानी॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
दया-सुधा बरसावनि
मातु! कृपा कीजै।
हरिपद प्रेम दान कर
अपनो कर लीजै॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
जय भगवद् गीते,
माता जय भगवद् गीते।
हरि हिय कमल-विहारिणि
सुन्दर सुपुनीते॥
जय भगवद् गीते, माता जय...॥
श्रीमद भगवद गीता आरती का महत्व
श्रीमद भगवद गीता आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
श्रीमद भगवद गीता आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- श्रीमद भगवद गीता के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
श्रीमद भगवद गीता आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार में गाना शुभ माना जाता है।
- विशेष पूजा के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- श्रीमद भगवद गीता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
श्रीमद भगवद गीता आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रीमद भगवद गीता आरती कब गानी चाहिए?
श्रीमद भगवद गीता आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्रीमद भगवद गीता आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
श्रीमद भगवद गीता आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
श्रीमद भगवद गीता आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।