आरती
श्री भैरव आरती (Lord Bhairava Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
श्री भैरव आरती भैरव की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में भैरव की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह श्री भैरव आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री भैरव आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री भैरव आरती (पूरा पाठ)
सुनो जी भैरव लाड़िले,
कर जोड़ कर विनती करूँ।
कृपा तुम्हारी चाहिए,
मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ।
मैं चरण छुता आपके,
अर्जी मेरी सुन लीजिये॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
मैं हूँ मति का मन्द,
मेरी कुछ मदद तो कीजिये।
महिमा तुम्हारी बहुत,
कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
करते सवारी स्वान की,
चारों दिशा में राज्य है।
जितने भूत और प्रेत,
सबके आप ही सरताज हैं॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
हथियार हैं जो आपके,
उसका क्या वर्णन करूँ।
माता जी के सामने तुम,
नृत्य भी करते सदा॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
गा गा के गुण अनुवाद से,
उनको रिझाते हो सदा।
एक सांकली है आपकी,
तारीफ उसकी क्या करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
बहुत सी महिमा तुम्हारी,
मेंहदीपुर सरनाम है।
आते जगत के यात्री,
बजरंग का स्थान है॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
श्री प्रेतराज सरकार के,
मैं शीश चरणों में धरूँ।
निशदिन तुम्हारे खेल से,
माताजी खुश रहें॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
सिर पर तुम्हारे हाथ रख कर,
आशीर्वाद देती रहें।
कर जोड़ कर विनती करूँ,
अरु शीश चरणों में धरूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
श्री भैरव आरती का महत्व
श्री भैरव आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
श्री भैरव आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- भैरव के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
श्री भैरव आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- सोमवार में गाना शुभ माना जाता है।
- महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
श्री भैरव आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री भैरव आरती कब गानी चाहिए?
श्री भैरव आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्री भैरव आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
श्री भैरव आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
श्री भैरव आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।