आरती
चित्रगुप्त जी महाराज आरती (Chitragupt Ji Maharaj Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
चित्रगुप्त जी महाराज आरती चित्रगुप्त जी महाराज की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में चित्रगुप्त जी महाराज की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से भाई दूज तथा यम द्वितीया के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह चित्रगुप्त जी महाराज आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। चित्रगुप्त जी महाराज आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
चित्रगुप्त जी महाराज आरती (पूरा पाठ)
ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्त जनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,
सन्तन सुखदायी।
भक्तन के प्रतिपालक,
त्रिभुवन यश छायी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
रूप चतुर्भुज,
श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।
मातु इरावती,
दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण,
प्रभु अन्तर्यामी।
सृष्टि संहारण, जन दुःख हारण,
प्रकट हुये स्वामी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
कलम, दवात, शङ्ख,
पत्रिका, कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवन मन मोहै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
सिंहासन का कार्य सम्भाला,
ब्रह्मा हर्षाये।
तैंतीस कोटि देवता,
चरणन में धाये॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
नृपति सौदास, भीष्म पितामह,
याद तुम्हें कीन्हा।
वेगि विलम्ब न लायो,
इच्छित फल दीन्हा॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
दारा, सुत, भगिनी,
सब अपने स्वास्थ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी,
तुम तज मैं भर्ता॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी,
पाप पुण्य लिखते।
हम हैं शरण तिहारी,
आस न दूजी करते॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
चित्रगुप्त जी महाराज आरती का महत्व
चित्रगुप्त जी महाराज आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
चित्रगुप्त जी महाराज आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- चित्रगुप्त जी महाराज के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
चित्रगुप्त जी महाराज आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- भाई दूज में गाना शुभ माना जाता है।
- यम द्वितीया के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- चित्रगुप्त जी महाराज की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
चित्रगुप्त जी महाराज आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चित्रगुप्त जी महाराज आरती कब गानी चाहिए?
चित्रगुप्त जी महाराज आरती गाने से क्या लाभ होता है?
चित्रगुप्त जी महाराज आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
चित्रगुप्त जी महाराज आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
चित्रगुप्त जी महाराज आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।