आरती
एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
एकादशी माता की आरती एकादशी की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में एकादशी की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह एकादशी माता की आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। एकादशी माता की आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
एकादशी माता की आरती (पूरा पाठ)
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,
जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,
शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी...॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी,
भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता,
शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,
विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,
मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी...॥
पौष के कृष्णपक्ष की,
सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,
आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी...॥
नाम षटतिला माघ मास में,
कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै,
विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष में
शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,
चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी...॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,
धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,
वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी...॥
शुक्ल पक्ष में होय
मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी,
शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी...॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों,
कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो,
शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
कामिका श्रावण मास में आवै,
कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय
पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी...॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,
परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,
व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी...॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,
आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै,
सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी...॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,
दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं
विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी...॥
परमा कृष्णपक्ष में होती,
जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय
पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
जो कोई आरती एकादशी की,
भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,
निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥
एकादशी माता की आरती का महत्व
एकादशी माता की आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
एकादशी माता की आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- एकादशी के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
एकादशी माता की आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- शुक्रवार में गाना शुभ माना जाता है।
- नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- एकादशी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
एकादशी माता की आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी माता की आरती कब गानी चाहिए?
एकादशी माता की आरती गाने से क्या लाभ होता है?
एकादशी माता की आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
एकादशी माता की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
एकादशी माता की आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।