आरती
आरती श्री गणपति जी (Shree Ganapati Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
आरती श्री गणपति जी आरती श्री गणपति जी की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में आरती श्री गणपति जी की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से बुधवार तथा गणेश चतुर्थी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह आरती श्री गणपति जी भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। आरती श्री गणपति जी के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
आरती श्री गणपति जी (पूरा पाठ)
गणपति की सेवा मंगल मेवा,
सेवा से सब विघ्न टरैं।
तीन लोक के सकल देवता,
द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,
अरु आनन्द सों चमर करैं।
धूप-दीप अरू लिए आरती
भक्त खड़े जयकार करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
गुड़ के मोदक भोग लगत हैं
मूषक वाहन चढ्या सरैं।
सौम्य रूप को देख गणपति के
विघ्न भाग जा दूर परैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थी
दिन दोपारा दूर परैं।
लियो जन्म गणपति प्रभु जी
दुर्गा मन आनन्द भरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
अद्भुत बाजा बजा इन्द्र का
देव बंधु सब गान करैं।
श्री शंकर के आनन्द उपज्या
नाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
आनि विधाता बैठे आसन,
इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।
देख वेद ब्रह्मा जी जाको
विघ्न विनाशक नाम धरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
एकदन्त गजवदन विनायक
त्रिनयन रूप अनूप धरैं।
पगथंभा सा उदर पुष्ट है
देव चन्द्रमा हास्य करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
दे शराप श्री चन्द्रदेव को
कलाहीन तत्काल करैं।
चौदह लोक में फिरें गणपति
तीन लोक में राज्य करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
उठि प्रभात जप करैं
ध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं
पूजा काल आरती गावैं।
ताके शिर यश छत्र फिरैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
गणपति की पूजा पहले करने से
काम सभी निर्विघ्न सरैं।
सभी भक्त गणपति जी के
हाथ जोड़कर स्तुति करैं॥
गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥
आरती श्री गणपति जी का महत्व
आरती श्री गणपति जी भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
आरती श्री गणपति जी गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- आरती श्री गणपति जी के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
आरती श्री गणपति जी गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- बुधवार में गाना शुभ माना जाता है।
- गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- आरती श्री गणपति जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
आरती श्री गणपति जी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती श्री गणपति जी कब गानी चाहिए?
आरती श्री गणपति जी गाने से क्या लाभ होता है?
आरती श्री गणपति जी क्या घर पर गाई जा सकती है?
आरती श्री गणपति जी के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
आरती श्री गणपति जी का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।