आरती
भगवान गङ्गाधर आरती (Lord Gangadhara Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
भगवान गङ्गाधर आरती भगवान गङ्गाधर की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में भगवान गङ्गाधर की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह भगवान गङ्गाधर आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। भगवान गङ्गाधर आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
भगवान गङ्गाधर आरती (पूरा पाठ)
ॐ जय गङ्गाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रुमविपिने।
गुन्जति मधुकरपुन्जे कुन्जवने गहने॥
कोकिलकूजित खेलत हन्सावन ललिता।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तस्मिन्ल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति भुषारज्जित निजमीशम्।
इन्द्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत हृदये मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वरसहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदङ्ग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते।
अङ्गुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कर्पूरघुतिगौरं पन्चाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्॥
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
शङ्खनिनदम् कृत्वा झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा वेद-ऋचां पठते॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥
सन्गतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
भगवान गङ्गाधर आरती का महत्व
भगवान गङ्गाधर आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
भगवान गङ्गाधर आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- भगवान गङ्गाधर के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
भगवान गङ्गाधर आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- सोमवार में गाना शुभ माना जाता है।
- महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- भगवान गङ्गाधर की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
भगवान गङ्गाधर आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवान गङ्गाधर आरती कब गानी चाहिए?
भगवान गङ्गाधर आरती गाने से क्या लाभ होता है?
भगवान गङ्गाधर आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
भगवान गङ्गाधर आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
भगवान गङ्गाधर आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।