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गायत्री माता आरती (Gayatri Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ

गायत्री माता आरती गायत्री माता की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।

इस आरती में गायत्री माता की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा गायत्री जयंती के समय श्रद्धा से गाया जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह गायत्री माता आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। गायत्री माता आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. गायत्री माता आरती (पूरा पाठ)
  2. गायत्री माता आरती का महत्व
  3. गायत्री माता आरती गाने के लाभ
  4. गायत्री माता आरती गाने की विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य आरती

गायत्री माता आरती (पूरा पाठ)

जयति जय गायत्री माता,

जयति जय गायत्री माता।

सत् मारग पर हमें चलाओ,

जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता...।

आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जन

जग पालन कर्त्री।

दुःख, शोक, भय, क्लेश,

कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥

जयति जय गायत्री माता...।

ब्रह्म रुपिणी, प्रणत पालिनी,

जगतधातृ अम्बे।

भवभयहारी, जनहितकारी,

सुखदा जगदम्बे॥

जयति जय गायत्री माता...।

भयहारिणि भवतारिणि अनघे,

अज आनन्द राशी।

अविकारी, अघहरी, अविचलित,

अमले, अविनाशी॥

जयति जय गायत्री माता...।

कामधेनु सत् चित् आनन्दा,

जय गंगा गीता।

सविता की शाश्वती शक्ति,

तुम सावित्री सीता॥

जयति जय गायत्री माता...।

ऋग्, यजु, साम, अथर्व,

प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे।

कुण्डलिनी सहस्रार,

सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥

जयति जय गायत्री माता...।

स्वाहा, स्वधा, शची,

ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी।

जय सतरुपा, वाणी, विद्या,

कमला, कल्याणी॥

जयति जय गायत्री माता...।

जननी हम है, दीन, हीन,

दुःख, दरिद्र के घेरे।

यदपि कुटिल, कपटी कपूत,

तऊ बालक है तेरे॥

जयति जय गायत्री माता...।

स्नेहसनी करुणामयि माता,

चरण शरण दीजै।

बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे,

दया दृष्टि कीजै॥

जयति जय गायत्री माता...।

काम, क्रोध, मद, लोभ,

दम्भ, दुर्भाव, द्वेष हरिये।

शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय,

मन को पवित्र करिये॥

जयति जय गायत्री माता...।

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी,

तुष्टि, पुष्टि त्राता।

सत् मार्ग पर हमें चलाओ,

जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता...।

आरती श्री गायत्रीजी की।

ज्ञानदीप और श्रद्धा की बाती।

सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

मानस की शुचि थाल के ऊपर।

देवी की ज्योत जगै, जहं नीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा।

बाजैं करै आसुह ही की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

जाके समक्ष हमें तिहुं लोक कै।

गद्दी मिलै सबहुं लगै फीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

संकट आवैं न पास कबौ तिन्हें।

सम्पदा और सुख की बनै लीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

आरती प्रेम सौ नेम सो करि।

ध्यावहिं मूरति ब्रह्म लली की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

गायत्री माता आरती का महत्व

गायत्री माता आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।

पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।

पूजा में उपयोग
  • दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
  • घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
  • सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।

गायत्री माता आरती गाने के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
  • गायत्री माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
  • पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।

मानसिक लाभ

  • मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  • दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
  • सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।

पारिवारिक पूजा में लाभ

  • समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
  • बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।

गायत्री माता आरती गाने की विधि

आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।

1. समय

  • प्रातःकाल में गाना शुभ माना जाता है।
  • गायत्री जयंती के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
  • पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।

2. तैयारी

  • पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  • दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
  • गायत्री माता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।

3. गायन क्रम

  • शांत मन से आरती शुरू करें।
  • स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
  • यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।

4. आरती के बाद

  • प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
  • कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।

गायत्री माता आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायत्री माता आरती कब गानी चाहिए?
गायत्री माता आरती को प्रातःकाल तथा गायत्री जयंती के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
गायत्री माता आरती गाने से क्या लाभ होता है?
गायत्री माता आरती गाने से भक्ति भाव बढ़ता है, मन शांत होता है और पूजा का वातावरण अधिक पवित्र बनता है।
गायत्री माता आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
हाँ, गायत्री माता आरती घर, मंदिर या पारिवारिक पूजा में श्रद्धा और स्वच्छ मन से गाई जा सकती है।
गायत्री माता आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के बाद प्रार्थना, प्रसाद वितरण और कुछ क्षण शांत भाव से स्मरण करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

गायत्री माता आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।

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