आरती
श्री गिरिराज आरती (Giriraj Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
श्री गिरिराज आरती गिरिराज की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में गिरिराज की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा विशेष पूजा के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह श्री गिरिराज आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री गिरिराज आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री गिरिराज आरती (पूरा पाठ)
ॐ जय जय जय गिरिराज,
स्वामी जय जय जय गिरिराज।
संकट में तुम राखौ,
निज भक्तन की लाज॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
इन्द्रादिक सब सुर मिल
तुम्हरौं ध्यान धरैं।
रिषि मुनिजन यश गावें,
ते भवसिन्धु तरैं॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
सुन्दर रूप तुम्हारौ
श्याम सिला सोहें।
वन उपवन लखि-लखि के
भक्तन मन मोहें॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
मध्य मानसी गङ्गा
कलि के मल हरनी।
तापै दीप जलावें,
उतरें वैतरनी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
नवल अप्सरा कुण्ड
सुहावन-पावन सुखकारी।
बायें राधा-कुण्ड नहावें
महा पापहारी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
तुम्ही मुक्ति के दाता
कलियुग के स्वामी।
दीनन के हो रक्षक
प्रभु अन्तरयामी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
हम हैं शरण तुम्हारी,
गिरिवर गिरधारी।
देवकीनंदन कृपा करो,
हे भक्तन हितकारी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
जो नर दे परिकम्मा
पूजन पाठ करें।
गावें नित्य आरती
पुनि नहिं जनम धरें॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
श्री गिरिराज आरती का महत्व
श्री गिरिराज आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
श्री गिरिराज आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- गिरिराज के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
श्री गिरिराज आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार में गाना शुभ माना जाता है।
- विशेष पूजा के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- गिरिराज की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
श्री गिरिराज आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री गिरिराज आरती कब गानी चाहिए?
श्री गिरिराज आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्री गिरिराज आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
श्री गिरिराज आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
श्री गिरिराज आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।