आरती
गोरख आरती (Gorakha Nath Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
गोरख आरती गोरख की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में गोरख की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा विशेष आराधना के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह गोरख आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। गोरख आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
गोरख आरती (पूरा पाठ)
जय गोरख देवा
जय गोरख देवा।
कर कृपा मम ऊपर
नित्य करूं सेवा॥
शीश जटा अति
सुन्दर भाल चन्द्र सोहे।
कानन कुण्डल झलकत
निरखत मन मोहे॥
गल सेली विच नाग सुशोभित
तन भस्मी धारी।
आदि पुरुष
योगीश्वर सन्तन हितकारी॥
नाथ निरंजन आप ही
घट-घट के वासी।
करत कृपा निज जन पर
मेटत यम फांसी॥
ऋद्धि सिद्धि चरणों में
लोटत माया है दासी।
आप अलख अवधूता
उत्तराखण्ड वासी॥
अगम अगोचर अकथ
अरूपी सबसे हो न्यारे।
योगीजन के आप ही
सदा हो रखवारे॥
ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा
निशदिन गुण गावें।
नारद शारद सुर मिल
चरनन चित लावें॥
चारों युग में आप विराजत
योगी तन धारी।
सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग
भय टारी॥
गुरु गोरख नाथ की आरती
निशदिन जो गावे।
विनवत बाल त्रिलोकी
मुक्ति फल पावे॥
गोरख आरती का महत्व
गोरख आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
गोरख आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- गोरख के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
गोरख आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार में गाना शुभ माना जाता है।
- विशेष आराधना के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- गोरख की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
गोरख आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोरख आरती कब गानी चाहिए?
गोरख आरती गाने से क्या लाभ होता है?
गोरख आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
गोरख आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
गोरख आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।