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श्री नर्मदा माता जी की आरती (Narmada Mata Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ

श्री नर्मदा माता जी की आरती नर्मदा माता की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।

इस आरती में नर्मदा माता की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह श्री नर्मदा माता जी की आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री नर्मदा माता जी की आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. श्री नर्मदा माता जी की आरती (पूरा पाठ)
  2. श्री नर्मदा माता जी की आरती का महत्व
  3. श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने के लाभ
  4. श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने की विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य आरती

श्री नर्मदा माता जी की आरती (पूरा पाठ)

ॐ जय जगदानन्दी,

मैया जय आनंद कन्दी।

ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा,

शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी नारद शारद तुम वरदायक,

अभिनव पदचण्डी।

सुर नर मुनि जन सेवत,

सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी धूमक वाहन राजत,

वीणा वादयन्ती।

झूमकत झूमकत झूमकत,

झननन झननन रमती राजन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी बाजत ताल मृदंगा,

सुरमण्डल रमती।

तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान,

तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत,

निशदिन आनन्दी।

गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा

शंकर तुम भव मेटन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

मैया जी को कंचन थाल विराजत,

अगर कपूर बाती।

अमरकंठ में विराजत,

घाटन घाट कोटी रतन जोती॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें,

हो रेवा जुग जुग नर गावें।

भजत शिवानंद स्वामी,

जपत हरि मन वांछित फल पावें॥

ॐ जय जगदानन्दी...॥

श्री नर्मदा माता जी की आरती का महत्व

श्री नर्मदा माता जी की आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।

पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।

पूजा में उपयोग
  • दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
  • घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
  • सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।

श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
  • नर्मदा माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
  • पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।

मानसिक लाभ

  • मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  • दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
  • सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।

पारिवारिक पूजा में लाभ

  • समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
  • बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।

श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने की विधि

आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।

1. समय

  • शुक्रवार में गाना शुभ माना जाता है।
  • नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
  • पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।

2. तैयारी

  • पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  • दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
  • नर्मदा माता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।

3. गायन क्रम

  • शांत मन से आरती शुरू करें।
  • स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
  • यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।

4. आरती के बाद

  • प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
  • कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।

श्री नर्मदा माता जी की आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री नर्मदा माता जी की आरती कब गानी चाहिए?
श्री नर्मदा माता जी की आरती को शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्री नर्मदा माता जी की आरती गाने से भक्ति भाव बढ़ता है, मन शांत होता है और पूजा का वातावरण अधिक पवित्र बनता है।
श्री नर्मदा माता जी की आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
हाँ, श्री नर्मदा माता जी की आरती घर, मंदिर या पारिवारिक पूजा में श्रद्धा और स्वच्छ मन से गाई जा सकती है।
श्री नर्मदा माता जी की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के बाद प्रार्थना, प्रसाद वितरण और कुछ क्षण शांत भाव से स्मरण करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

श्री नर्मदा माता जी की आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।

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