आरती
भगवान नटवर आरती (Lord Natavara Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
भगवान नटवर आरती भगवान नटवर की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में भगवान नटवर की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से बुधवार तथा जन्माष्टमी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह भगवान नटवर आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। भगवान नटवर आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
भगवान नटवर आरती (पूरा पाठ)
नन्द-सुवन जसुमतिके लाला,
गोधन गोपी प्रिय गोपाला।
देवप्रिय असुरनके काला,
मोहन विश्वविमोहन वर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
जय वसुदेव-देवकी-नन्दन,
कालयवन-कन्सादि-निकन्दन।
जगदाधार अजय जगवन्दन,
नित्य नवीन परम सुन्दर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
अकल कलाधर सकल विश्वधर,
विश्वम्भर कामद करुणाकर।
अजर, अमर, मायिक, मायाहर,
निर्गुन चिन्मय गुणमन्दिर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
पाण्डव-पूत परीक्षित रक्षक,
अतुलित अहि अघ मूषक-भक्षक।
जगमय जगत निरीह निरीक्षक,
ब्रह्म परात्पर परमेश्वर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
नित्य सत्य गोलोकविहारी,
अजाव्यक्त लीलावपुधारी।
लीलामय लीलाविस्तारी,
मधुर मनोहर राधावर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की,
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की,
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
भगवान नटवर आरती का महत्व
भगवान नटवर आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
भगवान नटवर आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- भगवान नटवर के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
भगवान नटवर आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- बुधवार में गाना शुभ माना जाता है।
- जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- भगवान नटवर की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
भगवान नटवर आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवान नटवर आरती कब गानी चाहिए?
भगवान नटवर आरती गाने से क्या लाभ होता है?
भगवान नटवर आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
भगवान नटवर आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
भगवान नटवर आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।