आरती
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती (Lord Purushottam Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती पुरुषोत्तम की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में पुरुषोत्तम की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा एकादशी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह श्री पुरुषोत्तम देव की आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री पुरुषोत्तम देव की आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती (पूरा पाठ)
जय पुरुषोत्तम देवा,
स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।
महिमा अमित तुम्हारी,
सुर-मुनि करें सेवा॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
सब मासों में उत्तम,
तुमको बतलाया।
कृपा हुई जब हरि की,
कृष्ण रूप पाया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
पूजा तुमको जिसने
सर्व सुक्ख दीना।
निर्मल करके काया,
पाप छार कीना॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
मेधावी मुनि कन्या,
महिमा जब जानी।
द्रोपदि नाम सती से,
जग ने सन्मानी॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
विप्र सुदेव सेवा कर,
मृत सुत पुनि पाया।
धाम हरि का पाया,
यश जग में छाया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
नृप दृढ़धन्वा पर जब,
तुमने कृपा करी।
व्रतविधि नियम और पूजा,
कीनी भक्ति भरी॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
शूद्र मणीग्रिव पापी,
दीपदान किया।
निर्मल बुद्धि तुम करके,
हरि धाम दिया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
पुरुषोत्तम व्रत-पूजा
हित चित से करते।
प्रभुदास भव नद से
सहजही वे तरते॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती का महत्व
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- पुरुषोत्तम के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार में गाना शुभ माना जाता है।
- एकादशी के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- पुरुषोत्तम की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती कब गानी चाहिए?
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
श्री पुरुषोत्तम देव की आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।