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संतोषी माता आरती (Santoshi Mata Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ

संतोषी माता आरती संतोषी माता की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।

इस आरती में संतोषी माता की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह संतोषी माता आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। संतोषी माता आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. संतोषी माता आरती (पूरा पाठ)
  2. संतोषी माता आरती का महत्व
  3. संतोषी माता आरती गाने के लाभ
  4. संतोषी माता आरती गाने की विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य आरती

संतोषी माता आरती (पूरा पाठ)

जय सन्तोषी माता,

मैया जय सन्तोषी माता।

अपने सेवक जन को,

सुख सम्पत्ति दाता॥

जय सन्तोषी माता॥

सुन्दर चीर सुनहरी

माँ धारण कीन्हों।

हीरा पन्ना दमके,

तन श्रृंगार कीन्हों॥

जय सन्तोषी माता॥

गेरू लाल छटा छवि,

बदन कमल सोहे।

मन्द हंसत करुणामयी,

त्रिभुवन मन मोहे॥

जय सन्तोषी माता॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी,

चंवर ढुरें प्यारे।

धूप दीप मधुमेवा,

भोग धरें न्यारे॥

जय सन्तोषी माता॥

गुड़ अरु चना परमप्रिय,

तामे संतोष कियो।

सन्तोषी कहलाई,

भक्तन वैभव दियो॥

जय सन्तोषी माता॥

शुक्रवार प्रिय मानत,

आज दिवस सोही।

भक्त मण्डली छाई,

कथा सुनत मोही॥

जय सन्तोषी माता॥

मन्दिर जगमग ज्योति,

मंगल ध्वनि छाई।

विनय करें हम बालक,

चरनन सिर नाई॥

जय सन्तोषी माता॥

भक्ति भावमय पूजा,

अंगीकृत कीजै।

जो मन बसै हमारे,

इच्छा फल दीजै॥

जय सन्तोषी माता॥

दुखी दरिद्री, रोग,

संकट मुक्त किये।

बहु धन-धान्य भरे घर,

सुख सौभाग्य दिये॥

जय सन्तोषी माता॥

ध्यान धर्यो जिस जन ने,

मनवांछित फल पायो।

पूजा कथा श्रवण कर,

घर आनन्द आयो॥

जय सन्तोषी माता॥

शरण गहे की लज्जा,

राखियो जगदम्बे।

संकट तू ही निवारे,

दयामयी अम्बे॥

जय सन्तोषी माता॥

सन्तोषी माता की आरती,

जो कोई जन गावे।

ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति,

जी भरकर पावे॥

जय सन्तोषी माता॥

संतोषी माता आरती का महत्व

संतोषी माता आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।

पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।

पूजा में उपयोग
  • दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
  • घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
  • सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।

संतोषी माता आरती गाने के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
  • संतोषी माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
  • पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।

मानसिक लाभ

  • मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  • दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
  • सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।

पारिवारिक पूजा में लाभ

  • समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
  • बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।

संतोषी माता आरती गाने की विधि

आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।

1. समय

  • शुक्रवार में गाना शुभ माना जाता है।
  • नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
  • पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।

2. तैयारी

  • पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  • दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
  • संतोषी माता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।

3. गायन क्रम

  • शांत मन से आरती शुरू करें।
  • स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
  • यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।

4. आरती के बाद

  • प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
  • कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।

संतोषी माता आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतोषी माता आरती कब गानी चाहिए?
संतोषी माता आरती को शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
संतोषी माता आरती गाने से क्या लाभ होता है?
संतोषी माता आरती गाने से भक्ति भाव बढ़ता है, मन शांत होता है और पूजा का वातावरण अधिक पवित्र बनता है।
संतोषी माता आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
हाँ, संतोषी माता आरती घर, मंदिर या पारिवारिक पूजा में श्रद्धा और स्वच्छ मन से गाई जा सकती है।
संतोषी माता आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के बाद प्रार्थना, प्रसाद वितरण और कुछ क्षण शांत भाव से स्मरण करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

संतोषी माता आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।

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