आरती
भगवान शंकर आरती (Lord Shankara Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
भगवान शंकर आरती भगवान शंकर की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में भगवान शंकर की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह भगवान शंकर आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। भगवान शंकर आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
भगवान शंकर आरती (पूरा पाठ)
जयति जयति जग-निवास,
शंकर सुखकारी॥
जयति जयति जग-निवास,
शंकर सुखकारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
अजर अमर अज अरूप,
सत चित आनन्दरूप।
व्यापक ब्रह्मस्वरूप,
भव! भव-भय-हारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
शोभित बिधुबाल भाल,
सुरसरिमय जटाजाल।
तीन नयन अति विशाल,
मदन-दहन-कारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
भक्तहेतु धरत शूल,
करत कठिन शूल फूल।
हियकी सब हरत हूल
अचल शान्तिकारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
अमल अरुण चरण कमल
सफल करत काम सकल।
भक्ति-मुक्ति देत विमल,
माया-भ्रम-टारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
कार्तिकेययुत गणेश,
हिमतनया सह महेश।
राजत कैलास-देश,
अकल कलाधारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
भूषण तन भूति ब्याल,
मुण्डमाल कर कपाल।
सिंह-चर्म हस्ति खाल,
डमरू कर धारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
अशरण जन नित्य शरण,
आशुतोष आर्तिहरण।
सब बिधि कल्याण-करण
जय जय त्रिपुरारी॥
जयति जयति जग-निवास...॥
भगवान शंकर आरती का महत्व
भगवान शंकर आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
भगवान शंकर आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- भगवान शंकर के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
भगवान शंकर आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- सोमवार में गाना शुभ माना जाता है।
- महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- भगवान शंकर की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
भगवान शंकर आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवान शंकर आरती कब गानी चाहिए?
भगवान शंकर आरती गाने से क्या लाभ होता है?
भगवान शंकर आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
भगवान शंकर आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
भगवान शंकर आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।