आरती
शीतला माता आरती (Sheetla Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
शीतला माता आरती शीतला माता की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में शीतला माता की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा नवरात्रि के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह शीतला माता आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। शीतला माता आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
शीतला माता आरती (पूरा पाठ)
जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी
सब फल की दाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रतन सिंहासन शोभित,
श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें,
जगमग छवि छाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
विष्णु सेवत ठाढ़े,
सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणत
पार नहीं पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
इन्द्र मृदङ्ग बजावत
चन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावै
नारद मुनि गाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
घण्टा शङ्ख शहनाई
बाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरती
लखि लखि हर्षाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
ब्रह्म रूप वरदानी
तुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देती
मातु पिता भ्राता॥
ॐ जय शीतला माता...।
जो जन ध्यान लगावे
प्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावे
भवनिधि तर जाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रोगों से जो पीड़ित कोई
शरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल काया
अन्ध नेत्र पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
बांझ पुत्र को पावे
दारिद्र कट जाता।
ताको भजै जो नाहीं
सिर धुनि पछताता॥
ॐ जय शीतला माता...।
शीतल करती जन की
तू ही है जग त्राता।
उत्पत्ति बाला बिनाशन
तू सब की माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
दास नारायण
कर जोरी माता।
भक्ति आपनी दीजै
और न कुछ माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
शीतला माता आरती का महत्व
शीतला माता आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
शीतला माता आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- शीतला माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
शीतला माता आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- शुक्रवार में गाना शुभ माना जाता है।
- नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- शीतला माता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
शीतला माता आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शीतला माता आरती कब गानी चाहिए?
शीतला माता आरती गाने से क्या लाभ होता है?
शीतला माता आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
शीतला माता आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
शीतला माता आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।