आरती
श्री विश्वकर्मा आरती (Lord Vishwakarma Aarti in Hindi) - पूरा पाठ, महत्व, विधि व लाभ
श्री विश्वकर्मा आरती विश्वकर्मा की आराधना में श्रद्धा से गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में विश्वकर्मा की महिमा, कृपा और संरक्षण का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा विश्वकर्मा जयंती के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यह श्री विश्वकर्मा आरती भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री विश्वकर्मा आरती के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री विश्वकर्मा आरती (पूरा पाठ)
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो
प्रभु विश्वकर्मा।
सुदामा की विनय सुनी
और कंचन महल बनाये।
सकल पदारथ देकर प्रभु जी
दुखियों के दुख टारे॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
विनय करी भगवान कृष्ण ने
द्वारिकापुरी बनाओ।
ग्वाल बालों की रक्षा की
प्रभु की लाज बचायो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
रामचन्द्र ने पूजन की
तब सेतु बांध रचि डारो।
सब सेना को पार किया
प्रभु लंका विजय करावो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
श्री कृष्ण की विजय सुनो
प्रभु आके दर्श दिखावो।
शिल्प विद्या का दो प्रकाश
मेरा जीवन सफल बनावो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
श्री विश्वकर्मा आरती का महत्व
श्री विश्वकर्मा आरती भक्त के मन में श्रद्धा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जगाती है।
पूजा के अंत में आरती गाने से वातावरण भक्तिमय होता है और परिवार या समूह के साथ सामूहिक आराधना का भाव मजबूत होता है।
- दीपक या आरती थाल के साथ गाई जाती है।
- घर, मंदिर और विशेष व्रत-पूजा में उपयोगी है।
- सामूहिक भक्ति में इसका प्रभाव और अधिक भावपूर्ण होता है।
श्री विश्वकर्मा आरती गाने के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
- विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
- पूजा का वातावरण अधिक शांत और पवित्र बनता है।
मानसिक लाभ
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
- दैनिक पूजा में नियमितता आती है।
- सकारात्मकता और संतुलन का अनुभव होता है।
पारिवारिक पूजा में लाभ
- समूह में एक साथ आरती गाने से सामूहिक श्रद्धा बढ़ती है।
- बच्चों और परिवार को पारंपरिक पाठ याद करने में मदद मिलती है।
श्री विश्वकर्मा आरती गाने की विधि
आरती गाते समय शुद्धता, श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार में गाना शुभ माना जाता है।
- विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- पूजा के अंत में आरती थाल के साथ गाना उपयुक्त है।
2. तैयारी
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दीपक, अगरबत्ती और आरती थाल तैयार रखें।
- विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें या खड़े हों।
3. गायन क्रम
- शांत मन से आरती शुरू करें।
- स्पष्ट स्वर और एक समान लय बनाए रखें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो सभी एक साथ बोल दोहराएँ।
4. आरती के बाद
- प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर ईश्वर का स्मरण करें।
श्री विश्वकर्मा आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री विश्वकर्मा आरती कब गानी चाहिए?
श्री विश्वकर्मा आरती गाने से क्या लाभ होता है?
श्री विश्वकर्मा आरती क्या घर पर गाई जा सकती है?
श्री विश्वकर्मा आरती के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
श्री विश्वकर्मा आरती का श्रद्धापूर्वक गायन पूजा को पूर्णता देता है और मन में भक्ति, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।