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आया बुलावा भवन से (Aaya Bulawa Bhawan Se Lyrics in Hindi) - पूरे लिरिक्स, भाव और गायन जानकारी

आया बुलावा भवन से माता रानी की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।

आया बुलावा भवन से के बोल भक्त के मन में विनम्रता, स्मरण और समर्पण का भाव जगाते हैं। यह भजन माता रानी की आराधना में मधुर भक्ति वातावरण बनाता है।

इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है और शुक्रवार के दिन भी इसे कई भक्त पढ़ते या गाते हैं।

भजन उपयोग सूचना

यह भजन-पृष्ठ भक्ति पठन और गीत-संदर्भ और भक्ति-सहयोग के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। अनेक भजन लोकप्रचलित, पारंपरिक या अलग-अलग प्रस्तुतियों में प्रचलित हो सकते हैं। मूल बोल, पारंपरिक रचना-अधिकार या विशिष्ट प्रस्तुति-अधिकार संबंधित स्रोतों के हो सकते हैं; Hindi Chalisa केवल सुव्यवस्थित भक्ति प्रस्तुति प्रदान करता है।

विषय सूची

  1. आया बुलावा भवन से (पूरे बोल)
  2. आया बुलावा भवन से का भाव
  3. आया बुलावा भवन से कब और कैसे गाएँ
  4. भजन से जुड़ी जानकारी
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य भजन

आया बुलावा भवन से (पूरे बोल)

आया बुलावा भवन से,

मैं रह ना पाई ॥

श्लोक – तेरे दरश की धुन में माता,

हम है हुए मतवाले,

रोक सकी ना आंधियां हमको,

ना ही बादल काले,

चढ़ चढ़ कठिन चढ़ाइया,

बेशक पाँव में पड़ गए छाले,

फिर भी तेरे दर आ पहुंचे,

हम है किस्मत वाले ॥

तेरी जय हो भवानी,

जय जय महा रानी ॥

आया बुलावा भवन से,

मैं रह ना पाई

अपने पति संग चढ़ के चढ़ाई,

नंगे पाँव आई,

लाल चुनरी चढाऊं, जय हो माँ,

तेरी ज्योति जगाऊं, जय हो माँ,

बस इतना वर चाहूँ,

मैं बस इतना वर पाऊं,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊं ॥

तेरी जय हो भवानी,

जय जय महा रानी ॥

हे अखंड ज्योत वाली माता,

मेरा भी अखंड सुहाग रहे,

सदा खनके चूड़ियाँ मेरे हाथों में,

सिंदूर भरी ये मेरी मांग रहे |

महके परिवार, जय हो माँ,

रहे खिली बहार, जय हो माँ,

कलियों की तरह मुस्काऊँ,

कलियों की तरह मुस्काऊँ,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊं ॥

तेरी जय हो भवानी,

जय जय महा रानी ॥

अपने भक्तो पर करती हो,

उपकार सदा,

ममता के खोले रहती हो,

भण्डार सदा,

मैं तो आई तेरे द्वार, जय हो माँ,

मेरे भाग्य सवार, जय हो माँ,

तेरी नित नित ज्योत जगाऊं,

तेरी नित नित ज्योत जगाऊं,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊं ॥

तेरी जय हो भवानी,

जय जय महा रानी ॥

मुझको वर दो मेरा स्वामी,

तेरी भक्ति में मगन रहे,

जब तक यह जीवन रहे ‘सरल’,

‘लक्खा’ को तेरी लगन रहे,

तेरा सच्चा दरबार, जय हो माँ,

तेरी महिमा अपार, जय हो माँ,

चरणों में शीश नवाऊं,

चरणों में शीश नवाऊं,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊं ॥

तेरी जय हो भवानी,

जय जय महा रानी ॥

आया बुलावा भवन से,

मैं रह ना पाई

अपने पति संग चढ़ के चढ़ाई,

नंगे पाँव आई,

लाल चुनरी चढाऊं, जय हो माँ,

तेरी ज्योति जगाऊं, जय हो माँ,

बस इतना वर चाहूँ,

मैं बस इतना वर पाऊं,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊं ॥

आया बुलावा भवन से का भाव

आया बुलावा भवन से माता रानी की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।

आया बुलावा भवन से में भक्त और आराध्य के बीच निकटता, विश्वास और भक्ति की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसके बोल सामूहिक गायन में भी बहुत मधुर लगते हैं और व्यक्तिगत भक्ति में भी मन को स्थिर करते हैं।

भक्ति अनुभव
  • भजन के बोल स्मरण और समर्पण का भाव मजबूत करते हैं।
  • सामूहिक गायन में इसकी लय और भाव भक्तों को जोड़ते हैं।
  • घर, सत्संग और मंदिर में इसे सहज रूप से गाया जा सकता है।

आया बुलावा भवन से कब और कैसे गाएँ

भजन गाते समय शुद्ध उच्चारण, सरल लय और श्रद्धा का भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

1. उपयुक्त अवसर

  • नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय यह भजन गाना उपयुक्त रहता है।
  • शुक्रवार के दिन भी कई भक्त इस भजन को विशेष रूप से गाते हैं।
  • मंदिर, परिवारिक पूजा, संकीर्तन या भक्तिगीत कार्यक्रम में इसे शामिल किया जा सकता है।

2. गायन की तैयारी

  • भजन से पहले कुछ क्षण शांत बैठकर आराध्य का स्मरण करें।
  • यदि समूह में गा रहे हों तो एक समान लय रखें।
  • भजन के साथ ताली, मंजीरा या साधारण कीर्तन शैली अपनाई जा सकती है।

3. भजन के बाद

  • छोटी प्रार्थना, आरती या नामस्मरण जोड़ना अच्छा माना जाता है।
  • कुछ क्षण शांत मन से आराध्य का ध्यान करें।

भजन से जुड़ी जानकारी

आया बुलावा भवन से एक लोकप्रिय भक्ति प्रस्तुति के रूप में अनेक भक्तों द्वारा गाया जाता है।

भजन से जुड़ी जानकारी
भजन प्रकारभजन
आराध्यमाता रानी
गीत नामAaya Bulawa Bhawan Se
अवसरनवरात्रि, जागरण और माता की चौकी

आया बुलावा भवन से से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आया बुलावा भवन से किस भाव से गाया जाता है?
आया बुलावा भवन से को विनम्रता, श्रद्धा और स्मरण के भाव से गाया जाता है। यह भजन माता रानी के प्रति समर्पण और भक्ति को व्यक्त करता है।
आया बुलावा भवन से कब गाया जाता है?
आया बुलावा भवन से को विशेष रूप से शुक्रवार तथा नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय गाया जाता है।
क्या आया बुलावा भवन से घर पर भी गाया जा सकता है?
हाँ, आया बुलावा भवन से को घर, सत्संग, मंदिर या पारिवारिक पूजा में श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
क्या आया बुलावा भवन से के साथ अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
भजन के साथ संबंधित आरती, चालीसा, नामस्मरण या छोटी प्रार्थना जोड़ना सामान्य भक्ति परंपरा माना जाता है।

निष्कर्ष

आया बुलावा भवन से भजन श्रद्धा, स्मरण और मधुर गायन का सुंदर संगम है। इसके पूरे बोल, भक्ति भाव और गायन अवसर को समझकर इसे अधिक आत्मीयता से गाया जा सकता है।

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