भजन
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर (Aayo Gandgaon Se Holi Khelan Natwar Nand Kishor Lyrics in Hindi) - पूरे लिरिक्स, भाव और गायन जानकारी
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर के बोल भक्त के मन में विनम्रता, स्मरण और समर्पण का भाव जगाते हैं। यह भजन श्रीकृष्ण की आराधना में मधुर भक्ति वातावरण बनाता है।
इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
यह भजन-पृष्ठ भक्ति पठन और गीत-संदर्भ और भक्ति-सहयोग के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। अनेक भजन लोकप्रचलित, पारंपरिक या अलग-अलग प्रस्तुतियों में प्रचलित हो सकते हैं। मूल बोल, पारंपरिक रचना-अधिकार या विशिष्ट प्रस्तुति-अधिकार संबंधित स्रोतों के हो सकते हैं; Hindi Chalisa केवल सुव्यवस्थित भक्ति प्रस्तुति प्रदान करता है।
विषय सूची
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर (पूरे बोल)
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर ।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर ।
नटवर नंद किशोर, आयो छलिया मखन चोर ।
आयो राधे राधे, आयो राधे राधे, आयो राधे राधे
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर ।
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
संग में ग्वाल बाल मस्ताने, रबड़ी टिकिया घोटे छाने।
सजे स्वांग में ढप मनमाने ।
बने सखा पर लगे जनाने ।
भेट गुलाल हाथ पिचकारी, छाए रहे चहुं ओर।
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
संघ झांझ ढप ढोल बजावत ।
तरह-तरह की गारी गावत ।
होली है, होली है शोर मचावत ।
अबीर गुलाल उड़ावत लावत भर भर बोर।
आयो राधे राधे, आयो राधे राधे, आयो राधे राधे
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
भीखम सखा फाग नहीं पावे ।
पकड़ जनानौ साज सजावे ।
घेर सकल सब नाच नचावे ।
इत में घेरूं गली रंगीली, उत्त साकली खोल।
आयो राधे राधे, आयो राधे राधे, आयो राधे राधे
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
यह है नंद गांव के पंडा ।
गाय चरावे बीने कांडा ।
आए लिन्हे ढाल प्रचंडा ।
झंडा छीन लगाओ डंडा, कर देओ भांडा फोड़ ।
आयो राधे राधे, आयो राधे राधे, आयो राधे राधे
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
आयो राधे राधे, आयो राधे राधे, आयो राधे राधे
आयो नंदगाँव से होरी खेलन नटवर नन्द किशोर ।
नटवर नन्द किशोर छलिया माखन चोर ।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर का भाव
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर में भक्त और आराध्य के बीच निकटता, विश्वास और भक्ति की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसके बोल सामूहिक गायन में भी बहुत मधुर लगते हैं और व्यक्तिगत भक्ति में भी मन को स्थिर करते हैं।
- भजन के बोल स्मरण और समर्पण का भाव मजबूत करते हैं।
- सामूहिक गायन में इसकी लय और भाव भक्तों को जोड़ते हैं।
- घर, सत्संग और मंदिर में इसे सहज रूप से गाया जा सकता है।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर कब और कैसे गाएँ
भजन गाते समय शुद्ध उच्चारण, सरल लय और श्रद्धा का भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. उपयुक्त अवसर
- जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय यह भजन गाना उपयुक्त रहता है।
- मंदिर, परिवारिक पूजा, संकीर्तन या भक्तिगीत कार्यक्रम में इसे शामिल किया जा सकता है।
2. गायन की तैयारी
- भजन से पहले कुछ क्षण शांत बैठकर आराध्य का स्मरण करें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो एक समान लय रखें।
- भजन के साथ ताली, मंजीरा या साधारण कीर्तन शैली अपनाई जा सकती है।
3. भजन के बाद
- छोटी प्रार्थना, आरती या नामस्मरण जोड़ना अच्छा माना जाता है।
- कुछ क्षण शांत मन से आराध्य का ध्यान करें।
भजन से जुड़ी जानकारी
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर एक लोकप्रिय भक्ति प्रस्तुति के रूप में अनेक भक्तों द्वारा गाया जाता है।
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर किस भाव से गाया जाता है?
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर कब गाया जाता है?
क्या आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर घर पर भी गाया जा सकता है?
क्या आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर के साथ अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
निष्कर्ष
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर भजन श्रद्धा, स्मरण और मधुर गायन का सुंदर संगम है। इसके पूरे बोल, भक्ति भाव और गायन अवसर को समझकर इसे अधिक आत्मीयता से गाया जा सकता है।