भजन
जय जयकार करो माता की (Jai Jaikaar Karo Mata Ki Lyrics in Hindi) - पूरे लिरिक्स, भाव और गायन जानकारी
जय जयकार करो माता की माता रानी की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
जय जयकार करो माता की के बोल भक्त के मन में विनम्रता, स्मरण और समर्पण का भाव जगाते हैं। यह भजन माता रानी की आराधना में मधुर भक्ति वातावरण बनाता है।
इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है और शुक्रवार के दिन भी इसे कई भक्त पढ़ते या गाते हैं।
यह भजन-पृष्ठ भक्ति पठन और गीत-संदर्भ और भक्ति-सहयोग के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। अनेक भजन लोकप्रचलित, पारंपरिक या अलग-अलग प्रस्तुतियों में प्रचलित हो सकते हैं। मूल बोल, पारंपरिक रचना-अधिकार या विशिष्ट प्रस्तुति-अधिकार संबंधित स्रोतों के हो सकते हैं; Hindi Chalisa केवल सुव्यवस्थित भक्ति प्रस्तुति प्रदान करता है।
विषय सूची
जय जयकार करो माता की (पूरे बोल)
जय जयकार करो माता की,
आओ शरण भवानी की
एक बार फिर प्रेम से बोलो
जय दुर्गा महारानी की
जय दुर्गा महारानी की
पहली देवी शैलपुत्री है किये बैल की सवारी
चंद्रमा माथे पर सोहे
सुन्दर रूप मनोहारी
सुन्दर रूप मनोहारी
लिए कमण्डल फूल कमल के
और रुद्राक्षो की माला
हुई दूसरी ब्रह्मचारिणी
करे जगत में उजियाला
करे जगत में उजियाला
पूर्ण चंद्रमा सी निर्मल
देवि चंद्रघंटा माता
इनके सुमिरण से निर्बल भी
बैरी पर है जय पता
बैरी पर है जय पता
जय जयकार करो माता की,
आओ शरण भवानी की
एक बार फिर प्रेम से बोलो
जय दुर्गा महारानी की
जय दुर्गा महारानी की
चौथी देवी कूष्मांडा है इनकी लीला है न्यारी
अमृत भरा कलश है कर में
किये बाघ की सवारी
किये बाघ की सवारी
कर में कमल सिंख परसिहासन
सब का शुभ करने वाली
मंगलमयी स्कन्दमाता माता है
जग का दुःख हरने वाली
जग का दुःख हरने वाली
मुनि कात्यानी की ये कन्या
है सबकी कत्यानी माँ
दानवता की शत्रु और
मानवता की सुखदायिनी माँ
मानवता की सुखदायिनी माँ
जय जयकार करो माता की,
आओ शरण भवानी की
एक बार फिर प्रेम से बोलो
जय दुर्गा महारानी की
जय दुर्गा महारानी की
यही कालरात्रि देवी है महाप्रलय ढाने वाली
सब प्राणी के खाने वाले
कल को भी खाने वाली
कल को भी खाने वाली
श्वेत बैल है वाहन जिनका
तन पर स्वेताम्बर भाता
यही महागौरी देवी है
सबकी जगदम्बा माता
सबकी जगदम्बा माता
शंख-चक्र और गदा पदम्
कर में धारण करने वाली
यही सिद्धिदात्री माता है
रिद्धि सिद्धि देने वाली
रिद्धि सिद्धि देने वाली
जय जयकार करो माता की का भाव
जय जयकार करो माता की माता रानी की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
जय जयकार करो माता की में भक्त और आराध्य के बीच निकटता, विश्वास और भक्ति की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसके बोल सामूहिक गायन में भी बहुत मधुर लगते हैं और व्यक्तिगत भक्ति में भी मन को स्थिर करते हैं।
- भजन के बोल स्मरण और समर्पण का भाव मजबूत करते हैं।
- सामूहिक गायन में इसकी लय और भाव भक्तों को जोड़ते हैं।
- घर, सत्संग और मंदिर में इसे सहज रूप से गाया जा सकता है।
जय जयकार करो माता की कब और कैसे गाएँ
भजन गाते समय शुद्ध उच्चारण, सरल लय और श्रद्धा का भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. उपयुक्त अवसर
- नवरात्रि, जागरण और माता की चौकी के समय यह भजन गाना उपयुक्त रहता है।
- शुक्रवार के दिन भी कई भक्त इस भजन को विशेष रूप से गाते हैं।
- मंदिर, परिवारिक पूजा, संकीर्तन या भक्तिगीत कार्यक्रम में इसे शामिल किया जा सकता है।
2. गायन की तैयारी
- भजन से पहले कुछ क्षण शांत बैठकर आराध्य का स्मरण करें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो एक समान लय रखें।
- भजन के साथ ताली, मंजीरा या साधारण कीर्तन शैली अपनाई जा सकती है।
3. भजन के बाद
- छोटी प्रार्थना, आरती या नामस्मरण जोड़ना अच्छा माना जाता है।
- कुछ क्षण शांत मन से आराध्य का ध्यान करें।
भजन से जुड़ी जानकारी
जय जयकार करो माता की की लोकप्रिय प्रस्तुति Chitragupta Shrivastava द्वारा गाई गई मानी जाती है। यह भजन Nav Durga से भी जुड़ा हुआ है।
जय जयकार करो माता की से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जय जयकार करो माता की किस भाव से गाया जाता है?
जय जयकार करो माता की कब गाया जाता है?
क्या जय जयकार करो माता की घर पर भी गाया जा सकता है?
क्या जय जयकार करो माता की के साथ अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
निष्कर्ष
जय जयकार करो माता की भजन श्रद्धा, स्मरण और मधुर गायन का सुंदर संगम है। इसके पूरे बोल, भक्ति भाव और गायन अवसर को समझकर इसे अधिक आत्मीयता से गाया जा सकता है।