भजन
सजी धजी आयी होली (Saji Dhaji Aayi Holi Lyrics in Hindi) - पूरे लिरिक्स, भाव और गायन जानकारी
सजी धजी आयी होली श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
सजी धजी आयी होली के बोल भक्त के मन में विनम्रता, स्मरण और समर्पण का भाव जगाते हैं। यह भजन श्रीकृष्ण की आराधना में मधुर भक्ति वातावरण बनाता है।
इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
यह भजन-पृष्ठ भक्ति पठन और गीत-संदर्भ और भक्ति-सहयोग के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। अनेक भजन लोकप्रचलित, पारंपरिक या अलग-अलग प्रस्तुतियों में प्रचलित हो सकते हैं। मूल बोल, पारंपरिक रचना-अधिकार या विशिष्ट प्रस्तुति-अधिकार संबंधित स्रोतों के हो सकते हैं; Hindi Chalisa केवल सुव्यवस्थित भक्ति प्रस्तुति प्रदान करता है।
विषय सूची
सजी धजी आयी होली (पूरे बोल)
खिली बसंती, सरसों खिल गये टेसू और पलाश
रंग रंगीलों, रास रसिलो आया फागुन मास
बिखरी ख़ुशियों की सुगंध (आई होली)
घर घर आनंद ही आनंद (आई होली)
बिखरी ख़ुशियों की सुगंध
घर घर आनंद ही आनंद
ढ़ोल नगाड़े, नुक्कड़ बाड़े बाड़े
गली मोहल्ले, खुले भितल्ले
गूंज रहे होली के छंद
लायी रंगो उमंगों की फुहार
सजी धजी आयी होली
इतने रंगो के लागे अंबार
धूम मची आयी होली
भरी मारी पिचकारी
साड़ी अँगिया भिगोयी
होरी आयी देखो होरी आयी
सरारारा
लाल गुलाल गाल पर मल दे
ग्वाल बाल संघ राधा रानी होली खेले
तिन तिन न त्रकि धिन न
उड़ रहे अबीर गुलाल
नीले पीले लाल गुलाल
मस्ती में झूमे जन जन
रंग गये एक तन मन
बातें छोड़ो जी सब बेकार
झूमो नाचो आयी होली
ख़ुशियों का मनाओ त्योहार
बाँटो मिठाई आई होली
तिन तिन न
त्रकि
धिन दिन न न
धिन दिन न
धिन दिन न न
तिन तिन न
दिग धिग दिग धिग थई
सारारारारा
पीलो राम जैसे
नीले श्याम जैसे
मुख रंग बिरंगे
लगे एक जैसे
कोई सीता बनके
कोई राधा बनके
प्रेम रंग में डूबी
आपने अपने मन के
लायी रंगो उमंगों की फुहार
सजी धजी आयी होली
इतने रंगो के लगे अंबार
धूम मची आयी होली
बातें छोड़ो जी सब बेकार
झूमो नाचो आई होली
ख़ुशियों का मनाओ त्योहार
बाँटो मिठाई आई होली
सजी धजी आयी होली का भाव
सजी धजी आयी होली श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
सजी धजी आयी होली में भक्त और आराध्य के बीच निकटता, विश्वास और भक्ति की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसके बोल सामूहिक गायन में भी बहुत मधुर लगते हैं और व्यक्तिगत भक्ति में भी मन को स्थिर करते हैं।
- भजन के बोल स्मरण और समर्पण का भाव मजबूत करते हैं।
- सामूहिक गायन में इसकी लय और भाव भक्तों को जोड़ते हैं।
- घर, सत्संग और मंदिर में इसे सहज रूप से गाया जा सकता है।
सजी धजी आयी होली कब और कैसे गाएँ
भजन गाते समय शुद्ध उच्चारण, सरल लय और श्रद्धा का भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. उपयुक्त अवसर
- जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय यह भजन गाना उपयुक्त रहता है।
- मंदिर, परिवारिक पूजा, संकीर्तन या भक्तिगीत कार्यक्रम में इसे शामिल किया जा सकता है।
2. गायन की तैयारी
- भजन से पहले कुछ क्षण शांत बैठकर आराध्य का स्मरण करें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो एक समान लय रखें।
- भजन के साथ ताली, मंजीरा या साधारण कीर्तन शैली अपनाई जा सकती है।
3. भजन के बाद
- छोटी प्रार्थना, आरती या नामस्मरण जोड़ना अच्छा माना जाता है।
- कुछ क्षण शांत मन से आराध्य का ध्यान करें।
भजन से जुड़ी जानकारी
सजी धजी आयी होली एक लोकप्रिय भक्ति प्रस्तुति के रूप में अनेक भक्तों द्वारा गाया जाता है।
सजी धजी आयी होली से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सजी धजी आयी होली किस भाव से गाया जाता है?
सजी धजी आयी होली कब गाया जाता है?
क्या सजी धजी आयी होली घर पर भी गाया जा सकता है?
क्या सजी धजी आयी होली के साथ अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
निष्कर्ष
सजी धजी आयी होली भजन श्रद्धा, स्मरण और मधुर गायन का सुंदर संगम है। इसके पूरे बोल, भक्ति भाव और गायन अवसर को समझकर इसे अधिक आत्मीयता से गाया जा सकता है।