भजन
यशोमती नन्दन बृजबर नागर (Yashomati Nandan Brijwar Nagar Lyrics in Hindi) - पूरे लिरिक्स, भाव और गायन जानकारी
यशोमती नन्दन बृजबर नागर श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यशोमती नन्दन बृजबर नागर के बोल भक्त के मन में विनम्रता, स्मरण और समर्पण का भाव जगाते हैं। यह भजन श्रीकृष्ण की आराधना में मधुर भक्ति वातावरण बनाता है।
इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
यह भजन-पृष्ठ भक्ति पठन और गीत-संदर्भ और भक्ति-सहयोग के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। अनेक भजन लोकप्रचलित, पारंपरिक या अलग-अलग प्रस्तुतियों में प्रचलित हो सकते हैं। मूल बोल, पारंपरिक रचना-अधिकार या विशिष्ट प्रस्तुति-अधिकार संबंधित स्रोतों के हो सकते हैं; Hindi Chalisa केवल सुव्यवस्थित भक्ति प्रस्तुति प्रदान करता है।
विषय सूची
यशोमती नन्दन बृजबर नागर (पूरे बोल)
यशोमती नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा,
गोपी परण धन मदन मनोहर,
कालिया दमन विधान ।
यशोमति नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा ॥
अमलहरी नाम अमिय विलासा,
विपिन पुरंदर नवीन नगरबर,
बंशी बदन सुबासा ।
यशोमति नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा ॥
बृजजन पालन असुर कुल नाशन,
नन्द गोधन रखवाला,
गोविन्द माधव नवनीत तस्कर,
सुन्दर नन्द गोपाला ।
यशोमति नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा ॥
जामुन तट चल गोपी बसन हर,
रास रसिक कृपामय,
श्री राधावल्लभ बृन्दावन नटवर,
भकती विनोदाश्रय ।
यशोमति नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा ॥
यशोमती नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा,
गोपी परण धन मदन मनोहर,
कालिया दमन विधान ।
यशोमति नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
यशोमती नन्दन बृजबर नागर का भाव
यशोमती नन्दन बृजबर नागर श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाने वाला लोकप्रिय भजन है। इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय श्रद्धा से गाया जाता है।
यशोमती नन्दन बृजबर नागर में भक्त और आराध्य के बीच निकटता, विश्वास और भक्ति की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसके बोल सामूहिक गायन में भी बहुत मधुर लगते हैं और व्यक्तिगत भक्ति में भी मन को स्थिर करते हैं।
- भजन के बोल स्मरण और समर्पण का भाव मजबूत करते हैं।
- सामूहिक गायन में इसकी लय और भाव भक्तों को जोड़ते हैं।
- घर, सत्संग और मंदिर में इसे सहज रूप से गाया जा सकता है।
यशोमती नन्दन बृजबर नागर कब और कैसे गाएँ
भजन गाते समय शुद्ध उच्चारण, सरल लय और श्रद्धा का भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. उपयुक्त अवसर
- जन्माष्टमी, कीर्तन और रास उत्सव के समय यह भजन गाना उपयुक्त रहता है।
- मंदिर, परिवारिक पूजा, संकीर्तन या भक्तिगीत कार्यक्रम में इसे शामिल किया जा सकता है।
2. गायन की तैयारी
- भजन से पहले कुछ क्षण शांत बैठकर आराध्य का स्मरण करें।
- यदि समूह में गा रहे हों तो एक समान लय रखें।
- भजन के साथ ताली, मंजीरा या साधारण कीर्तन शैली अपनाई जा सकती है।
3. भजन के बाद
- छोटी प्रार्थना, आरती या नामस्मरण जोड़ना अच्छा माना जाता है।
- कुछ क्षण शांत मन से आराध्य का ध्यान करें।
भजन से जुड़ी जानकारी
यशोमती नन्दन बृजबर नागर एक लोकप्रिय भक्ति प्रस्तुति के रूप में अनेक भक्तों द्वारा गाया जाता है।
यशोमती नन्दन बृजबर नागर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यशोमती नन्दन बृजबर नागर किस भाव से गाया जाता है?
यशोमती नन्दन बृजबर नागर कब गाया जाता है?
क्या यशोमती नन्दन बृजबर नागर घर पर भी गाया जा सकता है?
क्या यशोमती नन्दन बृजबर नागर के साथ अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
निष्कर्ष
यशोमती नन्दन बृजबर नागर भजन श्रद्धा, स्मरण और मधुर गायन का सुंदर संगम है। इसके पूरे बोल, भक्ति भाव और गायन अवसर को समझकर इसे अधिक आत्मीयता से गाया जा सकता है।