चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा (Narsimha Chalisa in Hindi) - पाठ, लाभ, विधि व अर्थ
श्री नरसिंह चालीसा नरसिंह की स्तुति में श्रद्धा से पढ़ी जाने वाली एक लोकप्रिय चालीसा है।
इस पाठ में नरसिंह के गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा विशेष साधना दिवस के समय श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री नरसिंह चालीसा भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री नरसिंह चालीसा के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री नरसिंह चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)
पाठ
मास वैशाख कृतिका युत हरण मही को भार।
शुक्ल चतुर्दशी सोम दिन लियो नरसिंह अवतार।।
धन्य तुम्हारो सिंह तनु धन्य तुम्हारो नाम।
तुमरे सुमरन से प्रभु पूरन हो सब काम।।
नरसिंह देव में सुमरों तोहि
धन बल विद्या दान दे मोहि।।1।।
जय-जय नरसिंह कृपाला
करो सदा भक्तन प्रतिपाला।।2।।
विष्णु के अवतार दयाला
महाकाल कालन को काला।।3।।
नाम अनेक तुम्हारो बखानो
अल्प बुद्धि में ना कछु जानो।।4।।
हिरणाकुश नृप अति अभिमानी
तेहि के भार मही अकुलानी।।5।।
हिरणाकुश कयाधू के जाये
नाम भक्त प्रहलाद कहाये।।6।।
भक्त बना बिष्णु को दासा
पिता कियो मारन परसाया।।7।।
अस्त्र-शस्त्र मारे भुज दण्डा
अग्निदाह कियो प्रचंडा।।8।।
भक्त हेतु तुम लियो अवतारा
दुष्ट-दलन हरण महिभारा।।9।।
तुम भक्तन के भक्त तुम्हारे
प्रह्लाद के प्राण पियारे।।10।।
प्रगट भये फाड़कर तुम खम्भा
देख दुष्ट-दल भये अचंभा।।11।।
खड्ग जिह्व तनु सुंदर साजा
ऊर्ध्व केश महादृष्ट विराजा।।12।।
तप्त स्वर्ण सम बदन तुम्हारा
को वरने तुम्हरो विस्तारा।।13।।
रूप चतुर्भुज बदन विशाला
नख जिह्वा है अति विकराला।।14।।
स्वर्ण मुकुट बदन अति भारी
कानन कुंडल की छवि न्यारी।।15।।
भक्त प्रहलाद को तुमने उबारा
हिरणा कुश खल क्षण मह मारा।।16।।
ब्रह्मा बिष्णु तुम्हें नित ध्यावे
इंद्र-महेश सदा मन लावे।।17।।
वेद-पुराण तुम्हरो यश गावे
शेष शारदा पारन पावे।।18।।
जो नर धरो तुम्हरो ध्याना
ताको होय सदा कल्याना।।19।।
त्राहि-त्राहि प्रभु दु:ख निवारो
भव बंधन प्रभु आप ही टारो।।20।।
नित्य जपे जो नाम तिहारा
दु:ख-व्याधि हो निस्तारा।।21।।
संतानहीन जो जाप कराये
मन इच्छित सो नर सुत पावे।।22।।
बंध्या नारी सुसंतान को पावे
नर दरिद्र धनी होई जावे।।23।।
जो नरसिंह का जाप करावे
ताहि विपत्ति सपने नहीं आवे।।24।।
जो कामना करे मन माही
सब निश्चय सो सिद्ध हुई जाही।।25।।
जीवन मैं जो कछु संकट होई
निश्चय नरसिंह सुमरे सोई।।26।।
रोग ग्रसित जो ध्यावे कोई
ताकि काया कंचन होई।।27।।
डाकिनी-शाकिनी प्रेत-बेताला
ग्रह-व्याधि अरु यम विकराला।।28।।
प्रेत-पिशाच सबे भय खाए
यम के दूत निकट नहीं आवे।।29।।
सुमर नाम व्याधि सब भागे
रोग-शोक कबहूं नहीं लागे।।30।।
जाको नजर दोष हो भाई
सो नरसिंह चालीसा गाई।।31।।
हटे नजर होवे कल्याना
बचन सत्य साखी भगवाना।।32।।
जो नर ध्यान तुम्हारो लावे
सो नर मन वांछित फल पावे।।33।।
बनवाए जो मंदिर ज्ञानी
हो जावे वह नर जग मानी।।34।।
नित-प्रति पाठ करे इक बारा
सो नर रहे तुम्हारा प्यारा।।35।।
नरसिंह चालीसा जो जन गावे
दु:ख-दरिद्र ताके निकट न आवे।।36।।
चालीसा जो नर पढ़े-पढ़ावे
सो नर जग में सब कुछ पावे।।37।।
यह श्री नरसिंह चालीसा
पढ़े रंक होवे अवनीसा।।38।।
जो ध्यावे सो नर सुख पावे
तोही विमुख बहु दु:ख उठावे।।39।।
'शिवस्वरूप है शरण तुम्हारी
हरो नाथ सब विपत्ति हमारी'।।40।।
चारों युग गायें तेरी महिमा अपरंपार।
निज भक्तनु के प्राण हित लियो जगत अवतार।।
नरसिंह चालीसा जो पढ़े प्रेम मगन शत बार।
उस घर आनंद रहे वैभव बढ़े अपार।।
(इति श्री नरसिंह चालीसा संपूर्णम्)
श्री नरसिंह चालीसा का अर्थ
श्री नरसिंह चालीसा में नरसिंह के दिव्य गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का वर्णन मिलता है। इसका भावार्थ भक्त को श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक शक्ति की ओर प्रेरित करता है।
- नरसिंह की कृपा और संरक्षण का स्मरण।
- भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
- जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन लाना।
- नियमित पाठ से साधना और श्रद्धा में स्थिरता बढ़ाना।
श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने के लाभ
🌿 आध्यात्मिक लाभ
- आत्मिक शांति और भक्ति में वृद्धि।
- नरसिंह के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
- साधना में स्थिरता आती है।
🧠 मानसिक लाभ
- तनाव और चिंता में कमी।
- एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि।
- कठिन समय में धैर्य का भाव।
💪 शारीरिक लाभ
- सकारात्मक दिनचर्या का निर्माण।
- मानसिक शांति के कारण विश्राम का अनुभव।
- नियमित जप-पाठ से अनुशासन बढ़ता है।
🔥 संकट निवारण
- भय और नकारात्मकता में कमी।
- कठिन समय में आस्था और सहारा मिलता है।
श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने की विधि (सरल और प्रभावी)
श्री नरसिंह चालीसा का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और नियमितता के साथ किया जाए तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा होता है।
🕉️ 1. समय (कब पढ़ें?)
- प्रातःकाल - विशेष रूप से शुभ।
- विशेष साधना दिवस - विशेष साधना के लिए उत्तम।
- प्रातःकाल या शांत सायंकाल में पाठ किया जा सकता है।
🧼 2. तैयारी
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शांत और साफ स्थान चुनें।
- ईष्ट देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
- दीपक, धूप और जल रखें।
🔔 3. पाठ प्रारंभ से पहले
- दीपक जलाकर मन को शांत करें।
- कुछ क्षण आँखें बंद कर गहरी सांस लें।
- यदि चाहें तो अपने इष्ट मंत्र का स्मरण करें।
📖 4. पाठ कैसे करें?
- स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा के साथ पढ़ें।
- बीच में अनावश्यक बातचीत न करें।
- यदि मन भटके, तो पुनः पाठ पर ध्यान केंद्रित करें।
🔁 5. कितनी बार पढ़ें?
- दैनिक: 1 बार।
- 7 बार: विशेष प्रार्थना के लिए।
- 11 बार: संकल्पपूर्वक साधना के लिए।
- 40 दिन: गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन में।
🙏 6. पाठ के बाद
- ईश्वर को धन्यवाद दें।
- अपनी मनोकामना शांत मन से कहें।
- 1-2 मिनट मौन ध्यान करें।
श्री नरसिंह चालीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
श्री नरसिंह चालीसा में क्या वर्णित है?
श्री नरसिंह चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
क्या श्री नरसिंह चालीसा का पाठ घर पर किया जा सकता है?
श्री नरसिंह चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
निष्कर्ष
श्री नरसिंह चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ भक्त को भक्ति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।