चालीसा
शाकंभरी माता चालीसा (Shree Shakambhari Chalisa in Hindi) - पाठ, लाभ, विधि व अर्थ
शाकंभरी माता चालीसा शाकंभरी माता की स्तुति में श्रद्धा से पढ़ी जाने वाली एक लोकप्रिय चालीसा है।
इस पाठ में शाकंभरी माता के गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा विशेष साधना दिवस के समय श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह शाकंभरी माता चालीसा भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। शाकंभरी माता चालीसा के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
शाकंभरी माता चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)
दोहा
बन्दउ माँ शाकम्भरी,
चरणगुरु का धरकर ध्यान।
शाकम्भरी माँ चालीसा का,
करे प्रख्यान
आनन्दमयी जगदम्बिका,
अनन्त रूप भण्डार।
माँ शाकम्भरी की कृपा,
बनी रहे हर बार
चौपाई
शाकम्भरी माँ अति सुखकारी।
पूर्ण ब्रह्म सदा दुःख हारी
कारण करण जगत की दाता।
आनन्द चेतन विश्व विधाता
अमर जोत है मात तुम्हारी।
तुम ही सदा भगतन हितकारी
महिमा अमित अथाह अर्पणा।
ब्रह्म हरि हर मात अर्पणा
ज्ञान राशि हो दीन दयाली।
शरणागत घर भरती खुशहाली
नारायणी तुम ब्रह्म प्रकाशी।
जल-थल-नभ हो अविनाशी
कमल कान्तिमय शान्ति अनपा।
जोत मन मर्यादा जोत स्वरुपा
जब जब भक्तों ने है ध्याई।
जोत अपनी प्रकट हो आई
प्यारी बहन के संग विराजे।
मात शताक्षि संग ही साजे
भीम भयंकर रूप कराली।
तीसरी बहन की जोत निराली
चौथी बहिन भ्रामरी तेरी।
अद्भुत चंचल चित्त चितेरी
सम्मुख भैरव वीर खड़ा है।
दानव दल से खूब लड़ा है
शिव शंकर प्रभु भोले भण्डारी।
सदा शाकम्भरी माँ का चेरा
हाथ ध्वजा हनुमान विराजे।
युद्ध भूमि में माँ संग साजे
काल रात्रि धारे कराली।
बहिन मात की अति विकराली
दश विद्या नव दुर्गा आदि।
ध्याते तुम्हें परमार्थ वादि
अष्ट सिद्धि गणपति जी दाता।
बाल रूप शरणागत माता
माँ भण्डारे के रखवारी।
प्रथम पूजने के अधिकारी
जग की एक भ्रमण की कारण।
शिव शक्ति हो दुष्ट विदारण
भूरा देव लौकड़ा दूजा।
जिसकी होती पहली पूजा
बली बजरंगी तेरा चेरा।
चले संग यश गाता तेरा
पाँच कोस की खोल तुम्हारी।
तेरी लीला अति विस्तारी
रक्त दन्तिका तुम्हीं बनी हो।
रक्त पान कर असुर हनी हो
रक्त बीज का नाश किया था।
छिन्न मस्तिका रूप लिया था
सिद्ध योगिनी सहस्या राजे।
सात कुण्ड में आप विराजे
रूप मराल का तुमने धारा।
भोजन दे दे जन जन तारा
शोक पात से मुनि जन तारे।
शोक पात जन दुःख निवारे
भद्र काली कमलेश्वर आई।
कान्त शिवा भगतन सुखदाई
भोग भण्डारा हलवा पूरी।
ध्वजा नारियल तिलक सिंदुरी
लाल चुनरी लगती प्यारी।
ये ही भेंट ले दुःख निवारी
अंधे को तुम नयन दिखाती।
कोढ़ी काया सफल बनाती
बाँझन के घर बाल खिलाती।
निर्धन को धन खूब दिलाती
सुख दे दे भगत को तारे।
साधु सज्जन काज संवारे
भूमण्डल से जोत प्रकाशी।
शाकम्भरी माँ दुःख की नाशी
मधुर मधुर मुस्कान तुम्हारी।
जन्म जन्म पहचान हमारी
चरण कमल तेरे बलिहारी।
जै जै जै जग जननी तुम्हारी
कान्ता चालीसा अति सुखकारी।
संकट दुःख दुविधा सब टारी
जो कोई जन चालीसा गावे।
मात कृपा अति सुख पावे
कान्ता प्रसाद जगाधरी वासी।
भाव शाकम्भरी तत्व प्रकाशी
बार बार कहें कर जोरी।
विनती सुन शाकम्भरी मोरी
मैं सेवक हूँ दास तुम्हारा।
जननी करना भव निस्तारा
यह सौ बार पाठ करे कोई।
मातु कृपा अधिकारी सोई
संकट कष्ट को मात निवारे।
शोक मोह शत्रु न संहारे
निर्धन धन सुख सम्पत्ति पावे।
श्रद्धा भक्ति से चालीसा गावे
नौ रात्रों तक दीप जगावे।
सपरिवार मगन हो गावे
प्रेम से पाठ करे मन लाई।
कान्त शाकम्भरी अति सुखदाई
दोहा
दुर्गा सुर संहारणि,
करणि जग के काज।
शाकम्भरी जननि शिवे,
रखना मेरी लाज
युग युग तक व्रत तेरा,
करे भक्त उद्धार।
वो ही तेरा लाड़ला,
आवे तेरे द्वार
शाकंभरी माता चालीसा का अर्थ
शाकंभरी माता चालीसा में शाकंभरी माता के दिव्य गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का वर्णन मिलता है। इसका भावार्थ भक्त को श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक शक्ति की ओर प्रेरित करता है।
- शाकंभरी माता की कृपा और संरक्षण का स्मरण।
- भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
- जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन लाना।
- नियमित पाठ से साधना और श्रद्धा में स्थिरता बढ़ाना।
शाकंभरी माता चालीसा पढ़ने के लाभ
🌿 आध्यात्मिक लाभ
- आत्मिक शांति और भक्ति में वृद्धि।
- शाकंभरी माता के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
- साधना में स्थिरता आती है।
🧠 मानसिक लाभ
- तनाव और चिंता में कमी।
- एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि।
- कठिन समय में धैर्य का भाव।
💪 शारीरिक लाभ
- सकारात्मक दिनचर्या का निर्माण।
- मानसिक शांति के कारण विश्राम का अनुभव।
- नियमित जप-पाठ से अनुशासन बढ़ता है।
🔥 संकट निवारण
- भय और नकारात्मकता में कमी।
- कठिन समय में आस्था और सहारा मिलता है।
शाकंभरी माता चालीसा पढ़ने की विधि (सरल और प्रभावी)
शाकंभरी माता चालीसा का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और नियमितता के साथ किया जाए तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा होता है।
🕉️ 1. समय (कब पढ़ें?)
- प्रातःकाल - विशेष रूप से शुभ।
- विशेष साधना दिवस - विशेष साधना के लिए उत्तम।
- प्रातःकाल या शांत सायंकाल में पाठ किया जा सकता है।
🧼 2. तैयारी
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शांत और साफ स्थान चुनें।
- ईष्ट देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
- दीपक, धूप और जल रखें।
🔔 3. पाठ प्रारंभ से पहले
- दीपक जलाकर मन को शांत करें।
- कुछ क्षण आँखें बंद कर गहरी सांस लें।
- यदि चाहें तो अपने इष्ट मंत्र का स्मरण करें।
📖 4. पाठ कैसे करें?
- स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा के साथ पढ़ें।
- बीच में अनावश्यक बातचीत न करें।
- यदि मन भटके, तो पुनः पाठ पर ध्यान केंद्रित करें।
🔁 5. कितनी बार पढ़ें?
- दैनिक: 1 बार।
- 7 बार: विशेष प्रार्थना के लिए।
- 11 बार: संकल्पपूर्वक साधना के लिए।
- 40 दिन: गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन में।
🙏 6. पाठ के बाद
- ईश्वर को धन्यवाद दें।
- अपनी मनोकामना शांत मन से कहें।
- 1-2 मिनट मौन ध्यान करें।
शाकंभरी माता चालीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
शाकंभरी माता चालीसा में क्या वर्णित है?
शाकंभरी माता चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
क्या शाकंभरी माता चालीसा का पाठ घर पर किया जा सकता है?
शाकंभरी माता चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
शाकंभरी माता चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
निष्कर्ष
शाकंभरी माता चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ भक्त को भक्ति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।