चालीसा
श्री गोरखा चालीसा (Shri Gorakha Chalisa in Hindi) - पाठ, लाभ, विधि व अर्थ
श्री गोरखा चालीसा श्री गोरख नाथ की स्तुति में श्रद्धा से पढ़ी जाने वाली एक लोकप्रिय चालीसा है।
इस पाठ में श्री गोरख नाथ के गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा गोरखनाथ जयंती के समय श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री गोरखा चालीसा भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री गोरखा चालीसा के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री गोरखा चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)
दोहा
गणपति गिरजा पुत्र को, सुमिरूँ बारम्बार।
हाथ जोड़ बिनती करूँ, शारद नाम आधार॥
चौपाई
जय जय गोरख नाथ अविनाशी। कृपा करो गुरु देव प्रकाशी॥
जय जय जय गोरख गुण ज्ञानी। इच्छा रुप योगी वरदानी॥
अलख निरंजन तुम्हरो नामा। सदा करो भक्तन हित कामा॥
नाम तुम्हारा जो कोई गावे। जन्म जन्म के दुःख मिट जावे॥
जो कोई गोरख नाम सुनावे। भूत पिसाच निकट नहीं आवे॥
ज्ञान तुम्हारा योग से पावे। रुप तुम्हारा लख्या न जावे॥
निराकर तुम हो निर्वाणी। महिमा तुम्हारी वेद न जानी॥
घट घट के तुम अन्तर्यामी। सिद्ध चौरासी करे प्रणामी॥
भस्म अंग गल नाद विराजे। जटा शीश अति सुन्दर साजे॥
तुम बिन देव और नहीं दूजा। देव मुनि जन करते पूजा॥
चिदानन्द सन्तन हितकारी। मंगल करुण अमंगल हारी॥
पूर्ण ब्रह्म सकल घट वासी। गोरख नाथ सकल प्रकाशी॥
गोरख गोरख जो कोई ध्यावे। ब्रह्म रुप के दर्शन पावे॥
शंकर रुप धर डमरु बाजे। कानन कुण्डल सुन्दर साजे॥
नित्यानन्द है नाम तुम्हारा। असुर मार भक्तन रखवारा॥
अति विशाल है रुप तुम्हारा। सुर नर मुनि पावै न पारा॥
दीन बन्धु दीनन हितकारी। हरो पाप हम शरण तुम्हारी॥
योग युक्ति में हो प्रकाशा। सदा करो संतन तन वासा॥
प्रातःकाल ले नाम तुम्हारा। सिद्धि बढ़ै अरु योग प्रचारा॥
हठ हठ हठ गोरक्ष हठीले। मार मार वैरी के कीले॥
चल चल चल गोरख विकराला। दुश्मन मार करो बेहाला॥
जय जय जय गोरख अविनाशी। अपने जन की हरो चौरासी॥
अचल अगम है गोरख योगी। सिद्धि देवो हरो रस भोगी॥
काटो मार्ग यम को तुम आई। तुम बिन मेरा कौन सहाई॥
अजर-अमर है तुम्हारी देहा। सनकादिक सब जोरहिं नेहा॥
कोटिन रवि सम तेज तुम्हारा। है प्रसिद्ध जगत उजियारा॥
योगी लखे तुम्हारी माया। पार ब्रह्मा से ध्यान लगाया॥
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता। सब के हो तुम भाग्य विधाता॥
नाम जपत भय सब मिट जावे। साधक जन अनुराग बढ़ावे॥
भक्ति भाव जो मन में धारे। संकट काटहु नाथ हमारे॥
गोरख चरन कमल मन ध्याऊँ। जीवन सफल करहु मैं गाऊँ॥
जो यह चालीसा प्रेम सहारे। नित पढ़ि सुनै भवभय टारे॥
दोहा
गोरखनाथ दयाल प्रभु, राखहु लाज हमार।
नाम तुम्हारो जो जपै, तरै भवसिंधु अपार॥
श्री गोरखा चालीसा का अर्थ
श्री गोरखा चालीसा में श्री गोरख नाथ के दिव्य गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का वर्णन मिलता है। इसका भावार्थ भक्त को श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक शक्ति की ओर प्रेरित करता है।
- श्री गोरख नाथ की कृपा और संरक्षण का स्मरण।
- भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
- जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन लाना।
- नियमित पाठ से साधना और श्रद्धा में स्थिरता बढ़ाना।
श्री गोरखा चालीसा पढ़ने के लाभ
🌿 आध्यात्मिक लाभ
- आत्मिक शांति और भक्ति में वृद्धि।
- श्री गोरख नाथ के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
- साधना में स्थिरता आती है।
🧠 मानसिक लाभ
- तनाव और चिंता में कमी।
- एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि।
- कठिन समय में धैर्य का भाव।
💪 शारीरिक लाभ
- सकारात्मक दिनचर्या का निर्माण।
- मानसिक शांति के कारण विश्राम का अनुभव।
- नियमित जप-पाठ से अनुशासन बढ़ता है।
🔥 संकट निवारण
- भय और नकारात्मकता में कमी।
- कठिन समय में आस्था और सहारा मिलता है।
श्री गोरखा चालीसा पढ़ने की विधि (सरल और प्रभावी)
श्री गोरखा चालीसा का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और नियमितता के साथ किया जाए तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा होता है।
🕉️ 1. समय (कब पढ़ें?)
- प्रातःकाल - विशेष रूप से शुभ।
- गोरखनाथ जयंती - विशेष साधना के लिए उत्तम।
- प्रातःकाल या शांत सायंकाल में पाठ किया जा सकता है।
🧼 2. तैयारी
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शांत और साफ स्थान चुनें।
- ईष्ट देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
- दीपक, धूप और जल रखें।
🔔 3. पाठ प्रारंभ से पहले
- दीपक जलाकर मन को शांत करें।
- कुछ क्षण आँखें बंद कर गहरी सांस लें।
- यदि चाहें तो अपने इष्ट मंत्र का स्मरण करें।
📖 4. पाठ कैसे करें?
- स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा के साथ पढ़ें।
- बीच में अनावश्यक बातचीत न करें।
- यदि मन भटके, तो पुनः पाठ पर ध्यान केंद्रित करें।
🔁 5. कितनी बार पढ़ें?
- दैनिक: 1 बार।
- 7 बार: विशेष प्रार्थना के लिए।
- 11 बार: संकल्पपूर्वक साधना के लिए।
- 40 दिन: गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन में।
🙏 6. पाठ के बाद
- ईश्वर को धन्यवाद दें।
- अपनी मनोकामना शांत मन से कहें।
- 1-2 मिनट मौन ध्यान करें।
श्री गोरखा चालीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
श्री गोरखा चालीसा में क्या वर्णित है?
श्री गोरखा चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
क्या श्री गोरखा चालीसा का पाठ घर पर किया जा सकता है?
श्री गोरखा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
श्री गोरखा चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
निष्कर्ष
श्री गोरखा चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ भक्त को भक्ति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।