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श्री विश्वकर्मा चालीसा (Vishwakarma Chalisa in Hindi) - पाठ, लाभ, विधि व अर्थ

श्री विश्वकर्मा चालीसा विश्वकर्मा की स्तुति में श्रद्धा से पढ़ी जाने वाली एक लोकप्रिय चालीसा है।

इस पाठ में विश्वकर्मा के गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।

इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा विशेष साधना दिवस के समय श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह श्री विश्वकर्मा चालीसा भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री विश्वकर्मा चालीसा के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. श्री विश्वकर्मा चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)
  2. श्री विश्वकर्मा चालीसा का अर्थ
  3. श्री विश्वकर्मा चालीसा पढ़ने के लाभ
  4. श्री विश्वकर्मा चालीसा पढ़ने की विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य चालीसा

श्री विश्वकर्मा चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)

दोहा

विनय करौं कर जोड़कर,

मन वचन कर्म संभारि।

मोर मनोरथ पूर्ण कर,

विश्वकर्मा दुष्टारि

चौपाई

विश्वकर्मा तव नाम अनूपा।

पावन सुखद मनन अनरूपा

सुंदर सुयश भुवन दशचारी।

नित प्रति गावत गुण नरनारी

शारद शेष महेश भवानी।

कवि कोविद गुण ग्राहक ज्ञानी

आगम निगम पुराण महाना।

गुणातीत गुणवंत सयाना

जग महँ जे परमारथ वादी।

धर्म धुरंधर शुभ सनकादि

नित नित गुण यश गावत तेरे।

धन्य-धन्य विश्वकर्मा मेरे

आदि सृष्टि महँ तू अविनाशी।

मोक्ष धाम तजि आयो सुपासी

जग महँ प्रथम लीक शुभ जाकी।

भुवन चारि दश कीर्ति कला की

ब्रह्मचारी आदित्य भयो जब।

वेद पारंगत ऋषि भयो तब

दर्शन शास्त्र अरु विज्ञ पुराना।

कीर्ति कला इतिहास सुजाना

तुम आदि विश्वकर्मा कहलायो।

चौदह विधा भू पर फैलायो

लोह काष्ठ अरु ताम्र सुवर्णा।

शिला शिल्प जो पंचक वर्णा

दे शिक्षा दुख दारिद्र नाश्यो।

सुख समृद्धि जगमहँ परकाश्यो

सनकादिक ऋषि शिष्य तुम्हारे।

ब्रह्मादिक जै मुनीश पुकारे

जगत गुरु इस हेतु भये तुम।

तम-अज्ञान-समूह हने तुम

दिव्य अलौकिक गुण जाके वर।

विघ्न विनाशन भय टारन कर

सृष्टि करन हित नाम तुम्हारा।

ब्रह्मा विश्वकर्मा भय धारा

विष्णु अलौकिक जगरक्षक सम।

शिवकल्याणदायक अति अनुपम

नमो नमो विश्वकर्मा देवा।

सेवत सुलभ मनोरथ देवा

देव दनुज किन्नर गन्धर्वा।

प्रणवत युगल चरण पर सर्वा

अविचल भक्ति हृदय बस जाके।

चार पदारथ करतल जाके

सेवत तोहि भुवन दश चारी।

पावन चरण भवोभव कारी

विश्वकर्मा देवन कर देवा।

सेवत सुलभ अलौकिक मेवा

लौकिक कीर्ति कला भंडारा।

दाता त्रिभुवन यश विस्तारा

भुवन पुत्र विश्वकर्मा तनुधरि।

वेद अथर्वण तत्व मनन करि

अथर्ववेद अरु शिल्प शास्त्र का।

धनुर्वेद सब कृत्य आपका

जब जब विपति बड़ी देवन पर।

कष्ट हन्यो प्रभु कला सेवन कर

विष्णु चक्र अरु ब्रह्म कमण्डल।

रूद्र शूल सब रच्यो भूमण्डल

इन्द्र धनुष अरु धनुष पिनाका।

पुष्पक यान अलौकिक चाका

वायुयान मय उड़न खटोले।

विधुत कला तंत्र सब खोले

सूर्य चंद्र नवग्रह दिग्पाला।

लोक लोकान्तर व्योम पताला

अग्नि वायु क्षिति जल अकाशा।

आविष्कार सकल परकाशा

मनु मय त्वष्टा शिल्पी महाना।

देवागम मुनि पंथ सुजाना

लोक काष्ठ, शिल ताम्र सुकर्मा।

स्वर्णकार मय पंचक धर्मा

शिव दधीचि हरिश्चंद्र भुआरा।

कृत युग शिक्षा पालेऊ सारा

परशुराम, नल, नील, सुचेता।

रावण, राम शिष्य सब त्रेता

ध्वापर द्रोणाचार्य हुलासा।

विश्वकर्मा कुल कीन्ह प्रकाशा

मयकृत शिल्प युधिष्ठिर पायेऊ।

विश्वकर्मा चरणन चित ध्यायेऊ

नाना विधि तिलस्मी करि लेखा।

विक्रम पुतली दॄश्य अलेखा

वर्णातीत अकथ गुण सारा।

नमो नमो भय टारन हारा

दोहा

दिव्य ज्योति दिव्यांश प्रभु,

दिव्य ज्ञान प्रकाश।

दिव्य दॄष्टि तिहुँ,

कालमहँ विश्वकर्मा प्रभास

विनय करो करि जोरि,

युग पावन सुयश तुम्हार।

धारि हिय भावत रहे,

होय कृपा उद्गार

छन्द

जे नर सप्रेम विराग श्रद्धा,

सहित पढ़िहहि सुनि है।

विश्वास करि चालीसा चोपाई,

मनन करि गुनि है

भव फंद विघ्नों से उसे,

प्रभु विश्वकर्मा दूर कर।

मोक्ष सुख देंगे अवश्य ही,

कष्ट विपदा चूर कर

श्री विश्वकर्मा चालीसा का अर्थ

श्री विश्वकर्मा चालीसा में विश्वकर्मा के दिव्य गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का वर्णन मिलता है। इसका भावार्थ भक्त को श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक शक्ति की ओर प्रेरित करता है।

🕉️ संपूर्ण भावार्थ
  • विश्वकर्मा की कृपा और संरक्षण का स्मरण।
  • भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
  • जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन लाना।
  • नियमित पाठ से साधना और श्रद्धा में स्थिरता बढ़ाना।

श्री विश्वकर्मा चालीसा पढ़ने के लाभ

🌿 आध्यात्मिक लाभ

  • आत्मिक शांति और भक्ति में वृद्धि।
  • विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
  • साधना में स्थिरता आती है।

🧠 मानसिक लाभ

  • तनाव और चिंता में कमी।
  • एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि।
  • कठिन समय में धैर्य का भाव।

💪 शारीरिक लाभ

  • सकारात्मक दिनचर्या का निर्माण।
  • मानसिक शांति के कारण विश्राम का अनुभव।
  • नियमित जप-पाठ से अनुशासन बढ़ता है।

🔥 संकट निवारण

  • भय और नकारात्मकता में कमी।
  • कठिन समय में आस्था और सहारा मिलता है।

श्री विश्वकर्मा चालीसा पढ़ने की विधि (सरल और प्रभावी)

श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और नियमितता के साथ किया जाए तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा होता है।

🕉️ 1. समय (कब पढ़ें?)

  • प्रातःकाल - विशेष रूप से शुभ।
  • विशेष साधना दिवस - विशेष साधना के लिए उत्तम।
  • प्रातःकाल या शांत सायंकाल में पाठ किया जा सकता है।

🧼 2. तैयारी

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • शांत और साफ स्थान चुनें।
  • ईष्ट देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
  • दीपक, धूप और जल रखें।

🔔 3. पाठ प्रारंभ से पहले

  • दीपक जलाकर मन को शांत करें।
  • कुछ क्षण आँखें बंद कर गहरी सांस लें।
  • यदि चाहें तो अपने इष्ट मंत्र का स्मरण करें।

📖 4. पाठ कैसे करें?

  • स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा के साथ पढ़ें।
  • बीच में अनावश्यक बातचीत न करें।
  • यदि मन भटके, तो पुनः पाठ पर ध्यान केंद्रित करें।

🔁 5. कितनी बार पढ़ें?

  • दैनिक: 1 बार।
  • 7 बार: विशेष प्रार्थना के लिए।
  • 11 बार: संकल्पपूर्वक साधना के लिए।
  • 40 दिन: गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन में।

🙏 6. पाठ के बाद

  • ईश्वर को धन्यवाद दें।
  • अपनी मनोकामना शांत मन से कहें।
  • 1-2 मिनट मौन ध्यान करें।

श्री विश्वकर्मा चालीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

श्री विश्वकर्मा चालीसा में क्या वर्णित है?
इस चालीसा में विश्वकर्मा के स्वरूप, गुण, कृपा, संरक्षण और भक्तिपूर्ण स्मरण का वर्णन मिलता है।
श्री विश्वकर्मा चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ विशेष रूप से प्रातःकाल तथा विशेष साधना दिवस के समय करना शुभ माना जाता है।
क्या श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ घर पर किया जा सकता है?
हाँ, श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ घर पर स्वच्छ स्थान में श्रद्धा, स्पष्ट उच्चारण और शांत मन के साथ किया जा सकता है।
श्री विश्वकर्मा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
सामान्य रूप से 1 बार पाठ पर्याप्त माना जाता है। विशेष संकल्प, मनोकामना या साधना में 7, 11 या 40 दिनों तक नियमित पाठ किया जा सकता है।
श्री विश्वकर्मा चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
श्री विश्वकर्मा चालीसा के नियमित पाठ से मानसिक शांति, भक्ति, आत्मबल, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

निष्कर्ष

श्री विश्वकर्मा चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ भक्त को भक्ति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।

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