चालीसा
यमुना चालीसा (Yamuna Chalisa in Hindi) - पाठ, लाभ, विधि व अर्थ
यमुना चालीसा माँ यमुना की स्तुति में श्रद्धा से पढ़ी जाने वाली एक लोकप्रिय चालीसा है।
इस पाठ में माँ यमुना के गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।
इसे विशेष रूप से प्रातःकाल तथा यम द्वितीया के समय श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह यमुना चालीसा भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। यमुना चालीसा के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
यमुना चालीसा (पूरा पाठ - शुद्ध हिंदी में)
दोहा
प्रियसंग क्रीड़ा करत नित,
सुखनिधि वेद को सार ।
दरस परस ते पाप मिटे,
श्रीकृष्ण प्राण आधार ॥
यमुना पावन विमल सुजस,
भक्तिसकल रस खानि ।
शेष महेश वदंन करत,
महिमा न जाय बखानि ॥
पूजित सुरासुर मुकुन्द प्रिया,
सेवहि सकल नर-नार ।
प्रकटी मुक्ति हेतु जग,
सेवहि उतरहि पार ॥
बंदि चरण कर जोरी कहो,
सुनियों मातु पुकार ।
भक्ति चरण चित्त देई के,
कीजै भव ते पार ॥
चौपाई
जै जै जै यमुना महारानी ।
जय कालिन्दि कृष्ण पटरानी ॥१॥
रूप अनूप शोभा छवि न्यारी ।
माधव-प्रिया ब्रज शोभा भारी ॥२॥
भुवन बसी घोर तप कीन्हा ।
पूर्ण मनोरथ मुरारी कीन्हा ॥३॥
निज अर्धांगी तुम्ही अपनायों ।
सावँरो श्याम पति प्रिय पायो ॥४॥
रूप अलौकिक अद्भूत ज्योति ।
नीर रेणू दमकत ज्यूँ मोती ॥५॥
सूर्यसुता श्यामल सब अंगा ।
कोटिचन्द्र ध्युति कान्ति अभंगा ॥६॥
आश्रय ब्रजाधिश्वर लीन्हा ।
गोकुल बसी शुचि भक्तन कीन्हा ॥७॥
कृष्ण नन्द घर गोकुल आयों ।
चरण वन्दि करि दर्शन पायों ॥८॥
सोलह श्रृंगार भुज कंकण सोहे ।
कोटि काम लाजहि मन मोहें ॥९॥
कृष्णवेश नथ मोती राजत ।
नुपूर घुंघरू चरण में बाजत ॥१०॥
मणि माणक मुक्ता छवि नीकी ।
मोहनी रूप सब उपमा फिकी ॥११॥
मन्द चलहि प्रिय-प्रीतम प्यारी ।
रीझहि श्याम प्रिय प्रिया निहारी ॥१२॥
मोहन बस करि हृदय विराजत ।
बिनु प्रीतम क्षण चैन न पावत ॥१३॥
मुरलीधर जब मुरली बजावैं ।
संग केलि कर आनन्द पावैं ॥१४॥
मोर हंस कोकिल नित खेलत ।
जलखग कूजत मृदुबानी बोलत ॥१५॥
जा पर कृपा दृष्टि बरसावें ।
प्रेम को भेद सोई जन पावें ॥१६॥
नाम यमुना जब मुख पे आवें ।
सबहि अमगंल देखि टरि जावें ॥१७॥
भजे नाम यमुना अमृत रस ।
रहे साँवरो सदा ताहि बस ॥१८॥
करूणामयी सकल रसखानि ।
सुर नर मुनि बंदहि सब ज्ञानी ॥१९॥
भूतल प्रकटी अवतार जब लीन्हो ।
उध्दार सभी भक्तन को किन्हो ॥२०॥
शेष गिरा श्रुति पार न पावत ।
योगी जति मुनी ध्यान लगावत ॥२१॥
दंड प्रणाम जे आचमन करहि ।
नासहि अघ भवसिंधु तरहि ॥२२॥
भाव भक्ति से नीर न्हावें ।
देव सकल तेहि भाग्य सरावें ॥२३॥
करि ब्रज वास निरंतर ध्यावहि ।
परमानंद परम पद पावहि ॥२४॥
संत मुनिजन मज्जन करहि ।
नव भक्तिरस निज उर भरहि ॥२५॥
पूजा नेम चरण अनुरागी ।
होई अनुग्रह दरश बड़भागी ॥२६॥
दीपदान करि आरती करहि ।
अन्तर सुख मन निर्मल रहहि ॥२७॥
कीरति विशद विनय करी गावत ।
सिध्दि अलौकिक भक्ति पावत ॥२८॥
बड़े प्रेम श्रीयमुना पद गावें ।
मोहन सन्मुख सुनन को आवें ॥२९॥
आतुर होय शरणागत आवें ।
कृपाकरी ताहि बेगि अपनावें ॥३०॥
ममतामयी सब जानहि मन की ।
भव पीड़ा हरहि निज जन की ॥३१॥
शरण प्रतिपाल प्रिय कुंजेश्वरी ।
ब्रज उपमा प्रीतम प्राणेश्वरी ॥३२॥
श्रीजी यमुना कृपा जब होई ।
ब्रह्म सम्बन्ध जीव को होई ॥३३॥
पुष्टिमार्गी नित महिमा गावैं ।
कृष्ण चरण नित भक्ति दृढावैं ॥३४॥
नमो नमो श्री यमुने महारानी ।
नमो नमो श्रीपति पटरानी ॥३५॥
नमो नमो यमुने सुख करनी ।
नमो नमो यमुने दु: ख हरनी ॥३६॥
नमो कृष्णायैं सकल गुणखानी ।
श्रीहरिप्रिया निकुंज निवासिनी ॥३७॥
करूणामयी अब कृपा कीजैं ।
फदंकाटी मोहि शरण मे लीजैं ॥३८॥
जो यमुना चालिसा नित गावैं ।
कृपा प्रसाद ते सब सुख पावैं ॥३९॥
ज्ञान भक्ति धन कीर्ति पावहि ।
अंत समय श्रीधाम ते जावहि ॥४०॥
दोहा
भज चरन चित सुख करन,
हरन त्रिविध भव त्रास ।
भक्ति पाई आनंद रमन,
कृपा दृष्टि ब्रज वास ॥
यमुना चालिसा नित नेम ते,
पाठ करे मन लाय ।
कृष्ण चरण रति भक्ति दृढ,
भव बाधा मिट जाय ॥
॥ इति श्री यमुना चालीसा संपूर्णम् ॥
यमुना चालीसा का अर्थ
यमुना चालीसा में माँ यमुना के दिव्य गुण, कृपा, संरक्षण और भक्ति भाव का वर्णन मिलता है। इसका भावार्थ भक्त को श्रद्धा, धैर्य और आत्मिक शक्ति की ओर प्रेरित करता है।
- माँ यमुना की कृपा और संरक्षण का स्मरण।
- भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
- जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन लाना।
- नियमित पाठ से साधना और श्रद्धा में स्थिरता बढ़ाना।
यमुना चालीसा पढ़ने के लाभ
🌿 आध्यात्मिक लाभ
- आत्मिक शांति और भक्ति में वृद्धि।
- माँ यमुना के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
- साधना में स्थिरता आती है।
🧠 मानसिक लाभ
- तनाव और चिंता में कमी।
- एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि।
- कठिन समय में धैर्य का भाव।
💪 शारीरिक लाभ
- सकारात्मक दिनचर्या का निर्माण।
- मानसिक शांति के कारण विश्राम का अनुभव।
- नियमित जप-पाठ से अनुशासन बढ़ता है।
🔥 संकट निवारण
- भय और नकारात्मकता में कमी।
- कठिन समय में आस्था और सहारा मिलता है।
यमुना चालीसा पढ़ने की विधि (सरल और प्रभावी)
यमुना चालीसा का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और नियमितता के साथ किया जाए तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक गहरा होता है।
🕉️ 1. समय (कब पढ़ें?)
- प्रातःकाल - विशेष रूप से शुभ।
- यम द्वितीया - विशेष साधना के लिए उत्तम।
- प्रातःकाल या शांत सायंकाल में पाठ किया जा सकता है।
🧼 2. तैयारी
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शांत और साफ स्थान चुनें।
- ईष्ट देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
- दीपक, धूप और जल रखें।
🔔 3. पाठ प्रारंभ से पहले
- दीपक जलाकर मन को शांत करें।
- कुछ क्षण आँखें बंद कर गहरी सांस लें।
- यदि चाहें तो ॐ यमुनायै नमः का स्मरण करें।
📖 4. पाठ कैसे करें?
- स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा के साथ पढ़ें।
- बीच में अनावश्यक बातचीत न करें।
- यदि मन भटके, तो पुनः पाठ पर ध्यान केंद्रित करें।
🔁 5. कितनी बार पढ़ें?
- दैनिक: 1 बार।
- 7 बार: विशेष प्रार्थना के लिए।
- 11 बार: संकल्पपूर्वक साधना के लिए।
- 40 दिन: गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन में।
🙏 6. पाठ के बाद
- ईश्वर को धन्यवाद दें।
- अपनी मनोकामना शांत मन से कहें।
- 1-2 मिनट मौन ध्यान करें।
यमुना चालीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यमुना चालीसा में क्या वर्णित है?
यमुना चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
क्या यमुना चालीसा का पाठ घर पर किया जा सकता है?
यमुना चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
यमुना चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
निष्कर्ष
यमुना चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ भक्त को भक्ति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।