स्तोत्र
गणेश अष्टकम (Ganesha Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
गणेश अष्टकम गणेश से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
गणेश अष्टकम गणेश की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से बुधवार तथा गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह गणेश अष्टकम भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। गणेश अष्टकम के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
गणेश अष्टकम (संपूर्ण पाठ)
॥ अथ श्री गणेशाष्टकम् ॥
श्री गणेशाय नमः।
सर्वे उचुः।
यतोऽनन्तशक्तेरनन्ताश्च जीवा यतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते।
यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥1॥
यतश्चाविरासीज्जगत्सर्वमेतत्तथाऽब्जासनो विश्वगो विश्वगोप्ता।
तथेन्द्रादयो देवसङ्घा मनुष्याः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥2॥
यतो वह्निभानू भवो भूर्जलं च यतः सागराश्चन्द्रमा व्योम वायुः।
यतः स्थावरा जङ्गमा वृक्षसङ्घा सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥3॥
यतो दानवाः किन्नरा यक्षसङ्घा यतश्चारणा वारणाः श्वापदाश्च।
यतः पक्षिकीटा यतो वीरूधश्च सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥4॥
यतो बुद्धिरज्ञाननाशो मुमुक्षोर्यतः सम्पदो भक्तसन्तोषिकाः स्युः।
यतो विघ्ननाशो यतः कार्यसिद्धिः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥5॥
यतः पुत्रसम्पद्यतो वाञ्छितार्थो यतोऽभक्तविघ्नास्तथाऽनेकरूपाः।
यतः शोकमोहौ यतः काम एव सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥6॥
यतोऽनन्तशक्तिः स शेषो बभूव धराधारणेऽनेकरूपे च शक्तः।
यतोऽनेकधा स्वर्गलोका हि नाना सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥7॥
यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति।
परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥8॥
॥ फल श्रुति ॥
श्रीगणेश उवाच। पुनरूचे गणाधीशः स्तोत्रमेतत्पठेन्नरः।
त्रिसन्ध्यं त्रिदिनं तस्य सर्वं कार्यं भविष्यति॥9॥
यो जपेदष्टदिवसं श्लोकाष्टकमिदं शुभम्।
अष्टवारं चतुर्थ्यां तु सोऽष्टसिद्धिरवानप्नुयात्॥10॥
यः पठेन्मासमात्रं तु दशवारं दिने दिने।
स मोचयेद्वन्धगतं राजवध्यं न संशयः॥11॥
विद्याकामो लभेद्विद्यां पुत्रार्थी पुत्रमाप्नुयात्।
वाञ्छितांल्लभते सर्वानेकविंशतिवारतः॥12॥
यो जपेत्परया भक्तया गजाननपरो नरः।
एवमुक्तवा ततो देवश्चान्तर्धानं गतः प्रभुः॥13॥
॥ इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे श्रीगणेशाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
गणेश अष्टकम का महत्व
गणेश अष्टकम गणेश से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
गणेश अष्टकम का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ गणेश के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
गणेश अष्टकम पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- गणेश के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
गणेश अष्टकम पाठ विधि
गणेश अष्टकम का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- बुधवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- गणेश चतुर्थी के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो ॐ गं गणपतये नमः का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
गणेश अष्टकम से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश अष्टकम कब पढ़ना चाहिए?
गणेश अष्टकम का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या गणेश अष्टकम घर पर पढ़ा जा सकता है?
गणेश अष्टकम पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
गणेश अष्टकम का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।