शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् के लिए वेब पोस्टर स्तोत्र

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् (Shankaracharya Krit Shiva Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् शंकराचार्य कृत शिव से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् शंकराचार्य कृत शिव की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।

इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
  2. शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का महत्व
  3. शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् पाठ के लाभ
  4. शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् पाठ विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य स्तोत्र

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् (संपूर्ण पाठ)

॥ शिवाष्टकम् ॥

तस्मै नमः परमकारणकारणाय

दीप्तोज्ज्वलज्ज्वलितपिङ्गललोचनाय।

नागेन्द्रहारकृतकुण्डलभूषणाय

ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नमः शिवाय॥1॥

श्रीमत्प्रसन्नशशिपन्नगभूषणाय

शैलेन्द्रजावदनचुम्बितलोचनाय।

कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय

लोकत्रयार्तिहरणाय नमः शिवाय॥2॥

पद्मावदातमणिकुण्डलगोवृषाय

कृष्णागरुप्रचुरचन्दनचर्चिताय।

भस्मानुषक्तविकचोत्पलमल्लिकाय

नीलाब्जकण्ठसदृशाय नमः शिवाय॥3॥

लम्बत्सपिङ्गलजटामुकुटोत्कटाय

दंष्ट्राकरालविकटोत्कटभैरवाय।

व्याघ्राजिनाम्बरधराय मनोहराय

त्रैलोक्यनाथनमिताय नमः शिवाय॥4॥

दक्षप्रजापतिमहामखनाशनाय

क्षिप्रं महात्रिपुरदानवघातनाय।

ब्रह्मोर्जितोर्ध्वगकरोटिनिकृन्तनाय

योगाय योगनमिताय नमः शिवाय॥5॥

संसारसृष्टिघटनापरिवर्तनाय

रक्षः पिशाचगणसिद्धसमाकुलाय।

सिद्धोरगग्रहगणेन्द्रनिषेविताय

शार्दूलचर्मवसनाय नमः शिवाय॥6॥

भस्माङ्गरागकृतरूपमनोहराय

सौम्यावदातवनमाश्रितमाश्रिताय।

गौरीकटाक्षनयनार्धनिरीक्षणाय

गोक्षीरधारधवलाय नमः शिवाय॥7॥

आदित्यसोमवरुणानिलसेविताय

यज्ञाग्निहोत्रवरधूमनिकेतनाय।

ऋक्सामवेदमुनिभिः स्तुतिसंयुताय

गोपाय गोपनमिताय नमः शिवाय॥8॥

शिवाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ इति श्री शङ्कराचार्यकृतं शिवाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का महत्व

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् शंकराचार्य कृत शिव से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ शंकराचार्य कृत शिव के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।

साधना में उपयोग
  • दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
  • चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
  • मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् पाठ के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
  • शंकराचार्य कृत शिव के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
  • मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।

मानसिक लाभ

  • एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
  • नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
  • सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।

साधना संबंधी लाभ

  • व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
  • पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् पाठ विधि

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।

1. समय

  • सोमवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
  • महाशिवरात्रि के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
  • प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।

2. तैयारी

  • स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
  • इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
  • यदि चाहें तो ॐ नमः शिवाय का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।

3. पाठ के बाद

  • कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
  • संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का पाठ सोमवार तथा महाशिवरात्रि के समय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जा सकता है।
शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का नियमित पाठ मन को स्थिरता, भक्ति, सकारात्मकता और साधना में निरंतरता देता है।
क्या शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
हाँ, शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् घर, मंदिर या व्यक्तिगत साधना के समय शुद्ध मन और शांत वातावरण में पढ़ा जा सकता है।
शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
स्वच्छ स्थान, शांत मन, दीपक या जल, और यदि संभव हो तो इष्ट देव की छवि के सामने बैठकर पाठ करना अधिक श्रेयस्कर माना जाता है।

निष्कर्ष

शंकराचार्य कृत शिव अष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।

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