स्तोत्र
श्री गौरीशाष्टकम (Shri Gaurisha Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री गौरीशाष्टकम गौरीशाष्टकम से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री गौरीशाष्टकम गौरीशाष्टकम की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से दैनिक पाठ तथा विशेष साधना के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री गौरीशाष्टकम भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री गौरीशाष्टकम के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री गौरीशाष्टकम (संपूर्ण पाठ)
॥ श्री गौरीशाष्टकम ॥
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते।
जलभवदुस्तरजलधिसुतरणं ध्येयं चित्ते शिवहरचरणम्।
अन्योपायं न हि न हि सत्यं गेयं शङ्कर शङ्कर नित्यम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥1॥
दारापत्यं क्षेत्रं वित्तं देहं गेहं सर्वमनित्यम्।
इति परिभावय सर्वमसारं गर्भविकृत्या स्वप्नविचारम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥2॥
मलवैचित्ये पुनरावृत्तिः पुनरपि जननीजठरोत्पत्तिः।
पुनरप्याशाकुलितं जठरं किं नहि मुञ्चसि कथयेश्चित्तम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥3॥
मायाकल्पितमैन्द्रं जालं न हि तत्सत्यं दृष्टिविकारम्।
ज्ञाते तत्त्वे सर्वमसारं मा कुरु मा कुरु विषयविचारम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥4॥
रज्जौ सर्पभ्रमणा- रोपस्तद्वद्ब्रह्मणि जगदारोपः।
मिथ्यामायामोहविकारं मनसि विचारय बारम्बारम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥5॥
अध्वरकोटीगङ्गागमनं कुरुते योगं चेन्द्रियदमनम्।
ज्ञानविहीनः सर्वमतेन न भवति मुक्तो जन्मशतेन।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥6॥
सोऽहं हंसो ब्रह्मैवाहं शुद्धानन्दस्तत्त्वपरोऽहम्।
अद्वैतोऽहं सङ्गविहीने चेन्द्रिय आत्मनि निखिले लीने।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥7॥
शङ्करकिंङ्कर मा कुरु चिन्तां चिंतामणिना विरचितमेतत्।
यः सद्भक्त्या पठति हि नित्यं ब्रह्मणि लीनो भवति हि सत्यम्।
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते॥8॥
॥ इति श्रीचिन्तामणिविरचितं गौरीशाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री गौरीशाष्टकम का महत्व
श्री गौरीशाष्टकम गौरीशाष्टकम से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री गौरीशाष्टकम का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ गौरीशाष्टकम के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री गौरीशाष्टकम पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- गौरीशाष्टकम के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री गौरीशाष्टकम पाठ विधि
श्री गौरीशाष्टकम का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- दैनिक पाठ के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- विशेष साधना के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो गौरीशाष्टकम स्मरण मंत्र का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री गौरीशाष्टकम से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री गौरीशाष्टकम कब पढ़ना चाहिए?
श्री गौरीशाष्टकम का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री गौरीशाष्टकम घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री गौरीशाष्टकम पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री गौरीशाष्टकम का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।