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हनुमान अष्टक (Sankat Mochan Hanuman Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि

हनुमान अष्टक हनुमान जी से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।

हनुमान अष्टक हनुमान जी की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।

इसे विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार तथा हनुमान जयंती के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।

पाठ संबंधी सूचना

यह हनुमान अष्टक भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। हनुमान अष्टक के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।

विषय सूची

  1. हनुमान अष्टक (संपूर्ण पाठ)
  2. हनुमान अष्टक का महत्व
  3. हनुमान अष्टक पाठ के लाभ
  4. हनुमान अष्टक पाठ विधि
  5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  6. निष्कर्ष
  7. अन्य स्तोत्र

हनुमान अष्टक (संपूर्ण पाठ)

॥ संकट मोचन हनुमानाष्टक ॥

॥ मत्तगयन्द छन्द ॥ बाल समय रवि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।

ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो।

देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥1॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महा मुनि साप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो।

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥2॥

अंगद के सँग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।

हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥3॥

रावन त्रास दई सिय को सब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो।

चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥4॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन के तुम प्रान उबारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥5॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो।

आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥6॥

बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो।

देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।

जाय सहाय भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥7॥

काज कियो बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कुछ संकट होय हमारो।

को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥8॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लँगूर।

बज्र देह दानव दलन, जय जय कपि सूर॥

हनुमान अष्टक का महत्व

हनुमान अष्टक हनुमान जी से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।

हनुमान अष्टक का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ हनुमान जी के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।

साधना में उपयोग
  • दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
  • चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
  • मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।

हनुमान अष्टक पाठ के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
  • हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
  • मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।

मानसिक लाभ

  • एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
  • नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
  • सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।

साधना संबंधी लाभ

  • व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
  • पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।

हनुमान अष्टक पाठ विधि

हनुमान अष्टक का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।

1. समय

  • मंगलवार, शनिवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
  • हनुमान जयंती के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
  • प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।

2. तैयारी

  • स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
  • इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
  • यदि चाहें तो ॐ हनुमते नमः का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।

3. पाठ के बाद

  • कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
  • संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।

हनुमान अष्टक से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान अष्टक कब पढ़ना चाहिए?
हनुमान अष्टक का पाठ मंगलवार, शनिवार तथा हनुमान जयंती के समय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जा सकता है।
हनुमान अष्टक का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
हनुमान अष्टक का नियमित पाठ मन को स्थिरता, भक्ति, सकारात्मकता और साधना में निरंतरता देता है।
क्या हनुमान अष्टक घर पर पढ़ा जा सकता है?
हाँ, हनुमान अष्टक घर, मंदिर या व्यक्तिगत साधना के समय शुद्ध मन और शांत वातावरण में पढ़ा जा सकता है।
हनुमान अष्टक पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
स्वच्छ स्थान, शांत मन, दीपक या जल, और यदि संभव हो तो इष्ट देव की छवि के सामने बैठकर पाठ करना अधिक श्रेयस्कर माना जाता है।

निष्कर्ष

हनुमान अष्टक का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।

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