स्तोत्र
श्री नन्दकुमाराष्टकम् (Shri Nandakumar Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री नन्दकुमाराष्टकम् नन्दकुमाराष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री नन्दकुमाराष्टकम् नन्दकुमाराष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से दैनिक पाठ तथा विशेष साधना के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री नन्दकुमाराष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री नन्दकुमाराष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री नन्दकुमाराष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ श्रीनन्दकुमाराष्टकम् ॥
सुन्दरगोपालम् उरवनमालं नयनविशालं दुःखहरं।
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं धरणिधर
वल्लभघनश्यामं पूर्णकामं अत्यभिरामं प्रीतिकरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥1॥
सुन्दरवारिजवदनं निर्जितमदनं आनन्दसदनं मुकुटधरं।
गुञ्जाकृतिहारं विपिनविहारं परमोदारं चीरहर
वल्लभपटपीतं कृतउपवीतं करनवनीतं विबुधवरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥2॥
शोभितमुखधूलं यमुनाकूलं निपटअतूलं सुखदतरं।
मुखमण्डितरेणुं चारितधेनुं वादितवेणुं मधुरसुर
वल्लभमतिविमलं शुभपदकमलं नखरुचिअमलं तिमिरहरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥3॥
शिरमुकुटसुदेशं कुञ्चितकेशं नटवरवेशं कामवरं।
मायाकृतमनुजं हलधरअनुजं प्रतिहतदनुजं भारहर
वल्लभव्रजपालं सुभगसुचालं हितमनुकालं भाववरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥4॥
इन्दीवरभासं प्रकटसुरासं कुसुमविकासं वंशिधरं।
हृतमन्मथमानं रूपनिधानं कृतकलगानं चित्तहर
वल्लभमृदुहासं कुञ्जनिवासं विविधविलासं केलिकरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥5॥
अतिपरप्रवीणं पालितदीनं भक्ताधीनं कर्मकरं।
मोहनमतिधीरं फणिबलवीरं हतपरवीरं तरलतर
वल्लभव्रजरमणं वारिजवदनं हलधरशमनं शैलधरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥6॥
जलधरद्युतिअङ्गं ललितत्रिभङ्गं बहुकृतरङ्गं रसिकवरं।
गोकुलपरिवारं मदनाकारं कुञ्जविहारं गूढतर
वल्लभव्रजचन्द्रं सुभगसुछन्दं कृतआनन्दं भ्रान्तिहरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥7॥
वन्दितयुगचरणं पावनकरणं जगदुद्धरणं विमलधरं।
कालियशिरगमनं कृतफणिनमनं घातितयमनं मृदुलतर
वल्लभदुःखहरणं निर्मलचरणम् अशरणशरणं मुक्तिकरं।
भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥8॥
॥ इति श्रीमहाप्रभुवल्लभाचार्यविरचितं श्रीनन्दकुमाराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री नन्दकुमाराष्टकम् का महत्व
श्री नन्दकुमाराष्टकम् नन्दकुमाराष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री नन्दकुमाराष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ नन्दकुमाराष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री नन्दकुमाराष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- नन्दकुमाराष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री नन्दकुमाराष्टकम् पाठ विधि
श्री नन्दकुमाराष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- दैनिक पाठ के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- विशेष साधना के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो नन्दकुमाराष्टकम् स्मरण मंत्र का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री नन्दकुमाराष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री नन्दकुमाराष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
श्री नन्दकुमाराष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री नन्दकुमाराष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री नन्दकुमाराष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री नन्दकुमाराष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।