स्तोत्र
श्री नृसिंहाष्टकम् (Shri Narasimha Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री नृसिंहाष्टकम् नृसिंहाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री नृसिंहाष्टकम् नृसिंहाष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा एकादशी के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री नृसिंहाष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री नृसिंहाष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री नृसिंहाष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ अथ श्रीनृसिंहाष्टकम् ॥
सुन्दरजामातृमुनेः प्रपद्ये चरणाम्बुजम्। संसारार्णवसंमग्नजन्तुसंतारपोतकम्॥
श्रीमदकलङ्क परिपूर्ण! शशिकोटि- श्रीधर! मनोहर! सटापटल कान्त!।
पालय कृपालय! भवाम्बुधि-निमग्नं दैत्यवरकाल! नरसिंह! नरसिंह!॥1॥
पादकमलावनत पातकि-जनानां पातकदवानल! पतत्रिवर-केतो!।
भावन! परायण! भवार्तिहरया मां पाहि कृपयैव नरसिंह! नरसिंह!॥2॥
तुङ्गनख-पङ्क्ति-दलितासुर-वरासृक् पङ्क-नवकुङ्कुम-विपङ्किल-महोरः।
पण्डितनिधान-कमलालय नमस्ते पङ्कजनिषण्ण! नरसिंह! नरसिंह!॥3॥
मौलेषु विभूषणमिवामर वराणां योगिहृदयेषु च शिरस्सु निगमानाम्।
राजदरविन्द-रुचिरं पदयुगं ते देहि मम मूर्ध्नि नरसिंह! नरसिंह!॥4॥
वारिजविलोचन! मदन्तिम-दशायां क्लेश-विवशीकृत-समस्त-करणायाम्।
एहि रमया सह शरण्य! विहगानां नाथमधिरुह्य नरसिंह! नरसिंह!॥5॥
हाटक-किरीट-वरहार-वनमाला धाररशना-मकरकुण्डल-मणीन्द्रैः।
भूषितमशेष-निलयं तव वपुर्मे चेतसि चकास्तु नरसिंह! नरसिंह!॥6॥
इन्दु रवि पावक विलोचन! रमायाः मन्दिर! महाभुज!-लसद्वर-रथाङ्ग!।
सुन्दर! चिराय रमतां त्वयि मनो मे नन्दित सुरेश! नरसिंह! नरसिंह!॥7॥
माधव! मुकुन्द! मधुसूदन! मुरारे! वामन! नृसिंह! शरणं भव नतानाम्।
कामद घृणिन् निखिलकारण नयेयं कालममरेश नरसिंह! नरसिंह!॥8॥
अष्टकमिदं सकल-पातक-भयघ्नं कामदं अशेष-दुरितामय-रिपुघ्नम्।
यः पठति सन्ततमशेष-निलयं ते गच्छति पदं स नरसिंह! नरसिंह!॥9॥
॥ इति श्रीनृसिंहाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री नृसिंहाष्टकम् का महत्व
श्री नृसिंहाष्टकम् नृसिंहाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री नृसिंहाष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ नृसिंहाष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री नृसिंहाष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- नृसिंहाष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री नृसिंहाष्टकम् पाठ विधि
श्री नृसिंहाष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- एकादशी के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो ॐ नमो नारायणाय का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री नृसिंहाष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री नृसिंहाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
श्री नृसिंहाष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री नृसिंहाष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री नृसिंहाष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री नृसिंहाष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।