स्तोत्र
श्री रामचन्द्र अष्टकम (Shri Rama Chandra Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री रामचन्द्र अष्टकम रामचन्द्र से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री रामचन्द्र अष्टकम रामचन्द्र की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से गुरुवार तथा राम नवमी के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री रामचन्द्र अष्टकम भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री रामचन्द्र अष्टकम के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री रामचन्द्र अष्टकम (संपूर्ण पाठ)
॥ श्रीरामचन्द्राष्टकम् ॥
चिदाकारो धाता परमसुखदः पावन-
तनुर्मुनीन्द्रैर्यो- गीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता।
सदा सेव्यः पूर्णो जनकतनयाङ्गः सुरगुरु
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥1॥
मुकुन्दो गोविन्दो जनकतनयालालितपदः
पदं प्राप्ता यस्याधमकुलभवा चापि शबरी।
गिरातीतोऽगम्यो विमलधिषणैर्वेदवचसा
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥2॥
धराधीशोऽधीशः सुरनरवराणां रघुपतिः
किरीटी केयूरी कनककपिशः शोभितवपुः।
समासीनः पीठे रविशतनिभे शान्तमनसो
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥3॥
वरेण्यः शारण्यः कपिपतिसखश्चान्तविधुरो
ललाटे काश्मीरो रुचिरगतिभङ्गः शशिमुखः।
नराकारो रामो यतिपतिनुतः संसृतिहरो
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्।॥4॥
विरूपाक्षः कश्यामुपदिशि यन्नाम शिवदं
सहस्रं यन्नाम्नां पठति गिरिजा प्रत्युषसि वै।
स्वलोके गायन्तीश्वरविधिमुखा यस्य चरितं
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥5॥
परो धीरोऽधीरोऽसुरकुल- भवश्चासुरहरः
परात्मा सर्वज्ञो नरसुरगणैर्गीतसुयशाः।
अहल्याशापघ्नः शरकरऋजुः कौशिकसखो
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥6॥
हृषीकेशः शौरिर्धरणि- धरशायी मधुरिपु-
रुपेन्द्रोवैकुण्ठो गजरिपुहरस्तुष्टमनसा।
बलिध्वंसी वीरो दशरथसुतो नीतिनिपुणो
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥7॥
कविः सौमित्रीड्यः कपटमृगघाती वनचरो
रणश्लाघी दान्तो धरणिभरहर्ता सुरनुतः।
अमानी मानज्ञो निखिलजनपूज्यो हृदिशयो
रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्॥8॥
इदं रामस्तोत्रं वरममरदासेन रचितमुषः
काले भक्त्या यदि पठति यो भावसहितम्।
मनुष्यः स क्षिप्रं जनिमृतिभयं तापजनकं
परित्यज्य श्रेष्ठं रघुपतिपदं याति शिवदम्॥9॥
॥ इति श्रीमद्रामदासपूज्यपादशिष्य
श्रीमद्धंसदासशिष्येणामरदासाख्यकविना
विरचितं श्रीरामचन्द्राष्टकं समाप्तम् ॥
श्री रामचन्द्र अष्टकम का महत्व
श्री रामचन्द्र अष्टकम रामचन्द्र से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री रामचन्द्र अष्टकम का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ रामचन्द्र के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री रामचन्द्र अष्टकम पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- रामचन्द्र के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री रामचन्द्र अष्टकम पाठ विधि
श्री रामचन्द्र अष्टकम का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- गुरुवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- राम नवमी के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो श्री रामाय नमः का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री रामचन्द्र अष्टकम से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री रामचन्द्र अष्टकम कब पढ़ना चाहिए?
श्री रामचन्द्र अष्टकम का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री रामचन्द्र अष्टकम घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री रामचन्द्र अष्टकम पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री रामचन्द्र अष्टकम का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।