स्तोत्र
श्री शीतलाष्टकम् (Shri Shitala Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री शीतलाष्टकम् शीतलाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री शीतलाष्टकम् शीतलाष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से दैनिक पाठ तथा विशेष साधना के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री शीतलाष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री शीतलाष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री शीतलाष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ अथ श्रीशीतलाष्टकम् ॥
॥ विनियोग ॥ अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दः। शीतला देवता।
लक्ष्मीर्बीजम्। भवानी शक्तिः।
सर्वविस्फोटकनिवृत्यर्थे जपे विनियोगः॥
ईश्वर उवाच। वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥1॥
वन्देऽहं शीतलां देवीं सर्वरोगभयापहाम्।
यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटकभयं महत्॥2॥
शीतले शीतले चेति यो ब्रूयद्दाहपीडितः।
विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥3॥
यस्त्वामुदकमध्ये तु ध्यात्वा सम्पूजयेन्नरः।
विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते॥4॥
शीतले ज्वरदग्धस्य पूतिगन्धयुतस्य च।
प्रणष्टचक्षुषः पुंसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम्॥5॥
शीतले तनुजान् रोगान् नृणां हरसि दुस्त्यजान्।
विस्फोटकविदीर्णानां त्वमेकाऽमृतवर्षिणी॥6॥
गलगण्डग्रहा रोगा ये चान्ये दारुणा नृणाम्।
त्वदनुध्यानमात्रेण शीतले यान्ति सङ्क्षयम्॥7॥
न मन्त्रो नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते।
त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम्॥8॥
॥ फल श्रुति ॥
मृणालतन्तुसदृशीं नाभिहृन्मध्यसंस्थिताम्।
यस्त्वां सञ्चिन्तयेद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते॥9॥
अष्टकं शीतलादेव्या यो नरः प्रपठेत्सदा।
विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते॥10॥
श्रोतव्यं पठितव्यं च श्रद्धाभाक्तिसमन्वितैः।
उपसर्गविनाशाय परं स्वस्त्ययनं महत्॥11॥
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥12॥
रासभो गर्दभश्चैव खरो वैशाखनन्दनः।
शीतलावाहनश्चैव दूर्वाकन्दनिकृन्तनः॥13॥
एतानि खरनामानि शीतलाग्रे तु यः पठेत्।
तस्य गेहे शिशूनां च शीतलारुङ् न जायते॥14॥
शीतलाष्टकमेवेदं न देयं यस्यकस्यचित्।
दातव्यं च सदा तस्मै श्रद्धाभक्तियुताय वै॥15॥
॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे शीतलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री शीतलाष्टकम् का महत्व
श्री शीतलाष्टकम् शीतलाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री शीतलाष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ शीतलाष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री शीतलाष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- शीतलाष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री शीतलाष्टकम् पाठ विधि
श्री शीतलाष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- दैनिक पाठ के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- विशेष साधना के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो शीतलाष्टकम् स्मरण मंत्र का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री शीतलाष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री शीतलाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
श्री शीतलाष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री शीतलाष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री शीतलाष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री शीतलाष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।