स्तोत्र
शिव रामाष्टकम् (Shiva Ramashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
शिव रामाष्टकम् शिव रामाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
शिव रामाष्टकम् शिव रामाष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह शिव रामाष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। शिव रामाष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
शिव रामाष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् ॥
शिवहरे शिवराम सखे प्रभो, त्रिविधताप-निवारण हे विभो।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥1॥
कमल लोचन राम दयानिधे, हर गुरो गजरक्षक गोपते।
शिवतनो भव शङ्कर पाहिमां, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥2॥
स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर, भजति तं पुरुषं परं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं, शिवहरे विजयं कुरू मे वरम्॥3॥
जय युधिष्ठिर-वल्लभ भूपते, जय जयार्जित-पुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तुते, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥4॥
भवविमोचन माधव मापते, सुकवि-मानस हंस शिवारते।
जनक जारत माधव रक्षमां, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥5॥
अवनि-मण्डल-मङ्गल मापते, जलद सुन्दर राम रमापते।
निगम-कीर्ति-गुणार्णव गोपते, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥6॥
पतित-पावन-नाममयी लता, तव यशो विमलं परिगीयते।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥7॥
अमर तापर देव रमापते, विनयतस्तव नाम धनोपमम्।
मयि कथं करुणार्णव जायते, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥8॥
हनुमतः प्रिय चाप कर प्रभो, सुरसरिद्-धृतशेखर हे गुरो।
मम विभो किमु विस्मरणं कृतं, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥9॥
नर हरेति परम् जन सुन्दरं, पठति यः शिवरामकृतस्तवम्।
विशति राम-रमा चरणाम्बुजे, शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥10॥
प्रातरूथाय यो भक्त्या पठदेकाग्रमानसः।
विजयो जायते तस्य विष्णु सान्निध्यमाप्नुयात्॥11॥
॥ इति श्रीरामानन्दस्वामिना विरचितं श्रीशिवरामाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
शिव रामाष्टकम् का महत्व
शिव रामाष्टकम् शिव रामाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
शिव रामाष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ शिव रामाष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
शिव रामाष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- शिव रामाष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
शिव रामाष्टकम् पाठ विधि
शिव रामाष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- सोमवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- महाशिवरात्रि के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो ॐ नमः शिवाय का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
शिव रामाष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिव रामाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
शिव रामाष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या शिव रामाष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
शिव रामाष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
शिव रामाष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।