स्तोत्र
श्रीविश्वनाथाष्टकम् (Shri Vishvanath Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्रीविश्वनाथाष्टकम् श्रीविश्वनाथाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्रीविश्वनाथाष्टकम् श्रीविश्वनाथाष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से दैनिक पाठ तथा विशेष साधना के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्रीविश्वनाथाष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्रीविश्वनाथाष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्रीविश्वनाथाष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ श्रीविश्वनाथाष्टकम् ॥
गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम्
नारायणप्रियमनङ्गमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥1॥
वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णुसुरसेवितपादपीठम्।
वामेन विग्रहवरेण कलत्रवन्तं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥2॥
भूताधिपं भुजगभूषणभूषिताङ्गं व्याघ्राजिनाम्बरधरं जटिलं त्रिनेत्रम्।
पाशाङ्कुशाभयवरप्रदशूलपाणिं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥3॥
शीतांशुशोभितकिरीटविराजमानं भालेक्षणानलविशोषितपञ्चबाणम्।
नागाधिपारचितभासुरकर्णपूरं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥4॥
पञ्चाननं दुरितमत्तमतङ्गजानां नागान्तकं दनुजपुङ्गवपन्नगानाम्।
दावानलं मरणशोकजराटवीनां वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥5॥
तेजोमयं सगुणनिर्गुणमद्वितीय- मानन्दकन्दमपराजितमप्रमेयम्।
नागात्मकं सकलनिष्कलमात्मरूपं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥6॥
रागादिदोषरहितं स्वजनानुरागं वैराग्यशान्तिनिलयं गिरिजासहायम्
माधुर्यधैर्यसुभगं गरलाभिरामं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥7॥
आशां विहाय परिहृत्य परस्य निन्दां पापे रतिं च सुनिवार्य मनः समाधौ।
आदाय हृत्कमलमध्यगतं परेशं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥8॥
वाराणसीपुरपतेः स्तवनं शिवस्य व्याख्यातमष्टकमिदं पठते मनुष्यः।
विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं सम्प्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम्॥9॥
विश्वनाथाष्टकमिदं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥10॥
॥ इति श्रीमहर्षिव्यासप्रणीतं श्रीविश्वनाथाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्रीविश्वनाथाष्टकम् का महत्व
श्रीविश्वनाथाष्टकम् श्रीविश्वनाथाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्रीविश्वनाथाष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ श्रीविश्वनाथाष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्रीविश्वनाथाष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- श्रीविश्वनाथाष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्रीविश्वनाथाष्टकम् पाठ विधि
श्रीविश्वनाथाष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- दैनिक पाठ के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- विशेष साधना के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो श्रीविश्वनाथाष्टकम् स्मरण मंत्र का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्रीविश्वनाथाष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रीविश्वनाथाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
श्रीविश्वनाथाष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्रीविश्वनाथाष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्रीविश्वनाथाष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्रीविश्वनाथाष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।