स्तोत्र
श्री यमुनाष्टकम् (Shri Yamuna Ashtakam in Hindi) - संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ व विधि
श्री यमुनाष्टकम् यमुनाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री यमुनाष्टकम् यमुनाष्टकम् की स्तुति, स्मरण और साधना में पढ़ा जाने वाला महत्वपूर्ण अष्टकम पाठ है।
इसे विशेष रूप से दैनिक पाठ तथा विशेष साधना के अवसर पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
यह श्री यमुनाष्टकम् भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर, उच्चारण या पंक्ति-विन्यास का अंतर मिल सकता है। श्री यमुनाष्टकम् के मूल पारंपरिक स्रोतों पर Hindi Chalisa स्वामित्व का दावा नहीं करता। यदि आपको किसी पृष्ठ में पाठांतर या त्रुटि दिखे तो हमें सूचित करें और विस्तृत नीति के लिए Disclaimer देखें।
विषय सूची
श्री यमुनाष्टकम् (संपूर्ण पाठ)
॥ श्रीयमुनाष्टकम् ॥
मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी।
मनोऽनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥1॥
मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवञ्चनातिपण्डितानिशम्।
सुनन्दनन्दनाङ्ग-सङ्गरागरञ्जिता हिता धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥2॥
लसत्तरङ्गसङ्गधूतभूतजातपातका नवीनमाधुरीधुरीणभक्तिजातचातका।
तटान्तवासदासहंससंसृता हि कामदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥3॥
विहाररासखेदभेदधीरतीरमारुता गता गिरामगोचरे यदीयनीरचारुता।
प्रवाहसाहचर्यपूतमेदिनीनदीनदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥4॥
तरङ्गसङ्गसैकताञ्चितान्तरा सदासिता शरन्निशाकरांशुमञ्जुमञ्जरीसभाजिता।
भवार्चनाय चारुणाम्बुनाधुना विशारदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥5॥
जलान्तकेलिकारिचारुराधिकाङ्गरागिणी स्वभर्तुरन्यदुर्लभाङ्गसङ्गतांशभागिनी।
स्वदत्तसुप्तसप्तसिन्धुभेदनातिकोविदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥6॥
जलच्युताच्युताङ्गरागलम्पटालिशालिनी विलोलराधिकाकचान्तचम्पकालिमालिनी।
सदावगाहनावतीर्णभर्तृभृत्यनारदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥7॥
सदैव नन्दनन्दकेलिशालिकुञ्जमञ्जुला तटोत्थफुल्लमल्लिकाकदम्बरेणुसूज्ज्वला।
जलावगाहिनां नृणां भवाब्धिसिन्धुपारदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा॥8॥
॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्रीयमुनाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री यमुनाष्टकम् का महत्व
श्री यमुनाष्टकम् यमुनाष्टकम् से जुड़ा लोकप्रिय अष्टकम पाठ है।
श्री यमुनाष्टकम् का पाठ भक्त को स्मरण, विनम्रता, भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता की ओर ले जाता है। यह पाठ यमुनाष्टकम् के गुणों और कृपा का चिंतन करने का माध्यम है।
- दैनिक जप या विशेष उपासना में शामिल किया जा सकता है।
- चालीसा, आरती या मंत्र जप के साथ भी पढ़ा जा सकता है।
- मन को स्थिर करने और भक्ति को गहरा करने में उपयोगी माना जाता है।
श्री यमुनाष्टकम् पाठ के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- भक्ति और साधना में नियमितता आती है।
- यमुनाष्टकम् के प्रति श्रद्धा और भाव बढ़ता है।
- मन में शांति और प्रार्थना का भाव गहरा होता है।
मानसिक लाभ
- एकाग्रता बढ़ती है और मन भटकाव से दूर रहता है।
- नियमित पाठ तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक होता है।
- सकारात्मक सोच और धैर्य को बल मिलता है।
साधना संबंधी लाभ
- व्रत, उपासना और विशेष पूजा में यह पाठ पूरक भूमिका निभाता है।
- पारिवारिक पाठ में इसे सरल रूप से शामिल किया जा सकता है।
श्री यमुनाष्टकम् पाठ विधि
श्री यमुनाष्टकम् का पाठ स्वच्छ स्थान, शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
1. समय
- दैनिक पाठ के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जा सकता है।
- विशेष साधना के अवसर पर इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल दोनों समय यह पाठ उपयुक्त है।
2. तैयारी
- स्वच्छ स्थान पर दीपक या जल रखें।
- इष्ट देव की छवि या प्रतिमा के सामने बैठें।
- यदि चाहें तो यमुनाष्टकम् स्मरण मंत्र का स्मरण कर पाठ आरंभ करें।
3. पाठ के बाद
- कुछ क्षण मौन बैठकर प्रार्थना करें।
- संबंधित आरती या छोटा मंत्र जप किया जा सकता है।
श्री यमुनाष्टकम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री यमुनाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
श्री यमुनाष्टकम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
क्या श्री यमुनाष्टकम् घर पर पढ़ा जा सकता है?
श्री यमुनाष्टकम् पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
निष्कर्ष
श्री यमुनाष्टकम् का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ साधना को व्यवस्थित, मन को शांत और भक्ति को स्थिर बनाने में सहायक होता है।