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गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesha Chaturthi Puja Vidhi in Hindi) - सामग्री, क्रम, मंत्र और संपूर्ण विधि

गणेश-पूजा के समय किये जाने वाले सम्पूर्ण उपचारों को नीचे सम्मिलित किया गया है। इन उपचारों में षोडशोपचार पूजा के सभी सोलह उपचार भी सम्मिलित हैं। दीप-प्रज्वलन एवं सङ्कल्प, पूजा प्रारम्भ होने से पूर्व किये जाते हैं। अतः दीप-प्रज्वलन तथा सङ्कल्प षोडशोपचार पूजा के सोलह उपचारों में सम्मिलित नहीं होते हैं। यदि भगवान गणपति आपके घर में अथवा पूजा स्थान में पहले से ही प्राण-प्रतिष्ठित हैं तो षोडशोपचार पूजा में सम्मिलित आवाहन एवं प्रतिष्ठापन के उपचारों को त्याग देना चाहिये। आवाहन एवं प्राण-प्रतिष्ठा मिट्टी अथवा धातु से निर्मित नवीन गणपति मूर्ति की ही की जाती है। यह भी उल्लेखनीय है कि घर अथवा पूजा स्थान में प्रतिष्ठित मूर्तियों का पूजा के पश्चात् विसर्जन के स्थान पर उत्थापन किया जाता है। गणेश चतुर्थी पूजा के दौरान भक्तगण भगवान गणपति की षोडशोपचार पूजा में एक-विंशति गणेश नाम पूजा तथा गणेश अङ्ग पूजा को भी सम्मिलित कर लेते हैं।

इस पृष्ठ में सामग्री, मुख्य चरण, उपयोगी मंत्र और सावधानियाँ सरल रूप में दी गई हैं ताकि पाठक पूजा को व्यवस्थित तरीके से कर सके।

इसे विशेष रूप से बुधवार, चतुर्थी तथा गणेश चतुर्थी के अवसर पर किया जा सकता है।

पूजा विधि संदर्भ सूचना

यह पूजा-विधि भक्ति और शैक्षिक संदर्भ के लिए दी गई है। घर, कुल-परंपरा, क्षेत्र, गुरु-परंपरा या आचार्य के अनुसार सामग्री, क्रम, मंत्र या निषेध बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान, व्रत या विस्तृत कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।

विषय सूची

  1. आवाहनम् एवं प्रतिष्ठापनम्
  2. आसन-समर्पणम्
  3. पाद्य-समर्पणम्
  4. अर्घ्य-समर्पणम्
  5. आचमनम्
  6. स्नानम्
  7. वस्त्र-समर्पणम् एवं उत्तरीय समर्पण
  8. यज्ञोपवीत-समर्पणम्
  9. गन्धः
  10. अक्षताः
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  12. निष्कर्ष
  13. अन्य पूजा विधि

आवाहनम् एवं प्रतिष्ठापनम्

सर्वप्रथम निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा प्रदर्शित करके उनका आवाहन करें।

हे हेरम्ब! त्वमेह्येहि ह्यम्बिकात्र्यम्बकात्मज। सिद्धिबुद्धिपते त्र्यक्ष लक्षलाभपितुः पितः॥ नागास्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम्। भूषितं स्वायुधैर्दिव्यैः पाशाङ्कुशपरस्वधैः॥

आवाहन के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश की मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा करें।

अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा क्षरन्तु च। अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सुप्रतिष्ठो वरदो भव॥

  • आवाहनम् सर्वप्रथम निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा प्रदर्शित करके उनका आवाहन करें। गणेश चतुर्थी पूजा विधि गणेश चतुर्थी आवाहन मन्त्र हे हेरम्ब! त्वमेह्येहि ह्यम्बिकात्र्यम्बकात्मज। सिद्धिबुद्धिपते त्र्यक्ष लक्षलाभपितुः पितः॥ नागास्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम्। भूषितं स्वायुधैर्दिव्यैः पाशाङ्कुशपरस्वधैः॥
  • प्रतिष्ठापनम् आवाहन के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश की मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा करें। गणेश चतुर्थी प्रतिष्ठापन मन्त्र अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा क्षरन्तु च। अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सुप्रतिष्ठो वरदो भव॥

आसन-समर्पणम्

आवाहन एवं प्रतिष्ठापन के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़े।

विचित्ररत्नखचितं दिव्यास्तरणसंयुतम्। स्वर्णसिंहासनं चारु गृहाण गुहाग्रज॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। आसनं समर्पयामि॥

पाद्य-समर्पणम्

आसन समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पाद्य (चरण धोने हेतु जल) समर्पित करें।

ॐ सर्वतीर्थसमुद्भूतं पाद्यं गन्धादिभिर्युतम्। गजानन गृहाणेदं भगवान् भक्तवत्सलः॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पादयोः पाद्यं समर्पयामि॥

अर्घ्य-समर्पणम्

पाद्य समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को गन्धमिश्रित अर्घ्य जल समर्पित करें।

ॐ गणाध्यक्ष नमस्तेऽस्तु गृहाण करुणाकर। अर्घ्यं च फलसंयुक्तं गन्धमाल्याक्षतैर्युतम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि॥

आचमनम्

अर्घ्य समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये आचमन के लिये भगवान गणेश को जल समर्पित करें।

विघ्नराज नमस्तुभ्यं त्रिदशैरभिवन्दित। गङ्गोदकेन देवेश कुरुष्वाचमनं प्रभो॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मुखे आचमनीयं समर्पयामि॥

स्नानम्

आचमन समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते लिये भगवान गणेश को जल से स्नान करायें।

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्। तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सर्वाङ्गस्नानं समर्पयामि॥

जल से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पञ्चामृत से स्नान करायें।

पञ्चामृतं मयाऽऽनीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पञ्चामृत-स्नानं समर्पयामि॥

पञ्चामृत से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पयः (दूध) से स्नान करायें।

कामधेनुसमुद्भूतं सर्वेषां जीवनं परम्। तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पयः-स्नानं समर्पयामि॥

पयः से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दही से स्नान करायें।

पयसस्तु समुद्भूतं मधुराम्लं शशिप्रभम्। दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। दधि-स्नानं समर्पयामि॥

दही से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को घी से स्नान करायें।

नवनीत-समुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्। घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। घृत-स्नानं समर्पयामि॥

घी से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शहद से स्नान करायें।

पुष्परेणुसमुद्भूतं सुस्वादु मधुरं मधु। तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मधु-स्नानं समर्पयामि॥

शहद से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शर्करा (शक्कर) से स्नान करायें।

इक्षुरससमुद्भूतां शर्करां पुष्टिदां शुभाम्। मलापहारिकां दिव्यां स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शर्करा-स्नानं समर्पयामि॥

शर्करा से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को सुगन्धित तेल से स्नान करायें।

चम्पाकाशेकबकुल-मालती-मोगरादिभिः। वासितं स्निग्धताहेतुर्तैलं चारु प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सुवासित-स्नानं समर्पयामि॥

सुगन्धित तेल से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शुद्ध जल से स्नान करायें।

गङ्गा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदा-सिन्धु-कावेरी स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शुद्धोदक-स्नानं समर्पयामि॥

  • स्नानम् आचमन समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते लिये भगवान गणेश को जल से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी स्नान मन्त्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्। तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सर्वाङ्गस्नानं समर्पयामि॥
  • पञ्चामृत-स्नानम् जल से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पञ्चामृत से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी पञ्चामृत स्नान मन्त्र पञ्चामृतं मयाऽऽनीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पञ्चामृत-स्नानं समर्पयामि॥
  • पयः-स्नानम् पञ्चामृत से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पयः (दूध) से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी पय स्नान मन्त्र कामधेनुसमुद्भूतं सर्वेषां जीवनं परम्। तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पयः-स्नानं समर्पयामि॥
  • दधि-स्नानम् पयः से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दही से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी दधि स्नान मन्त्र पयसस्तु समुद्भूतं मधुराम्लं शशिप्रभम्। दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। दधि-स्नानं समर्पयामि॥
  • घृत-स्नानम् दही से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को घी से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी घृत स्नान मन्त्र नवनीत-समुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्। घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। घृत-स्नानं समर्पयामि॥
  • मधु-स्नानम् घी से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शहद से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी मधु स्नान मन्त्र पुष्परेणुसमुद्भूतं सुस्वादु मधुरं मधु। तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मधु-स्नानं समर्पयामि॥
  • शर्करा-स्नानम् शहद से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शर्करा (शक्कर) से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी शर्करा स्नान मन्त्र इक्षुरससमुद्भूतां शर्करां पुष्टिदां शुभाम्। मलापहारिकां दिव्यां स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शर्करा-स्नानं समर्पयामि॥
  • सुवासित-स्नानम् शर्करा से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को सुगन्धित तेल से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी सुवासित स्नान मन्त्र चम्पाकाशेकबकुल-मालती-मोगरादिभिः। वासितं स्निग्धताहेतुर्तैलं चारु प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सुवासित-स्नानं समर्पयामि॥
  • शुद्धोदक-स्नानम् सुगन्धित तेल से स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शुद्ध जल से स्नान करायें। गणेश चतुर्थी शुद्धोदक स्नान मन्त्र गङ्गा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदा-सिन्धु-कावेरी स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शुद्धोदक-स्नानं समर्पयामि॥

वस्त्र-समर्पणम् एवं उत्तरीय समर्पण

शुद्धोदक स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।

शीतवातोष्णसन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालङ्करणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। वस्त्रं समर्पयामि॥

वस्त्र समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शरीर के ऊपरी अङ्गो के लिये वस्त्र समर्पित करें।

उत्तरीयं तथा देव नानाचित्रितमुत्तमम्। गृहाणेदं मया भक्त्या दत्तं तत् सफलीकुरु॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। उत्तरीयं समर्पयामि॥

  • वस्त्र-समर्पणम् शुद्धोदक स्नान के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें। गणेश चतुर्थी वस्त्र समर्पण मन्त्र शीतवातोष्णसन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालङ्करणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। वस्त्रं समर्पयामि॥
  • उत्तरीय-समर्पणम् वस्त्र समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शरीर के ऊपरी अङ्गो के लिये वस्त्र समर्पित करें। गणेश चतुर्थी उत्तरीय-समर्पण मन्त्र उत्तरीयं तथा देव नानाचित्रितमुत्तमम्। गृहाणेदं मया भक्त्या दत्तं तत् सफलीकुरु॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। उत्तरीयं समर्पयामि॥

यज्ञोपवीत-समर्पणम्

वस्त्र एवं उत्तरीय समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को यज्ञोपवीत समर्पित करें।

नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्। उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥

गन्धः

यज्ञोपवीत समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।

श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपणं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। गन्धं समर्पयामि॥

अक्षताः

गन्ध समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को अक्षत समर्पित करें।

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः। मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। अक्षतान् समर्पयामि॥

पुष्प-माला, शमी-पत्र, दुर्वाङ्कुर, सिन्दूर

अक्षत समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पुष्प माला समर्पित करें।

माल्यादीनि सुगन्धीनि माल्यत्यादीनि वै प्रभो। मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पुष्पमालां समर्पयामि॥

पुष्प माला समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शमी पत्र समर्पित करें।

त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै। शमीदलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शमी-पत्राणि समर्पयामि॥

शमी पत्र समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दूर्वाङ्कुर (तीन अथवा पाँच पत्र वाला दूर्वा) समर्पित करें।

दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि॥

दुर्वाङ्कुर समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को तिलक के लिये सिन्दूर समर्पित करें।

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सिन्दूरं समर्पयामि॥

  • पुष्प-माला अक्षत समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पुष्प माला समर्पित करें। गणेश चतुर्थी पुष्पमाला मन्त्र माल्यादीनि सुगन्धीनि माल्यत्यादीनि वै प्रभो। मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। पुष्पमालां समर्पयामि॥
  • शमी-पत्रम् पुष्प माला समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को शमी पत्र समर्पित करें। गणेश चतुर्थी शमी पत्र मन्त्र त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै। शमीदलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। शमी-पत्राणि समर्पयामि॥
  • दूर्वाङ्कुराः शमी पत्र समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दूर्वाङ्कुर (तीन अथवा पाँच पत्र वाला दूर्वा) समर्पित करें। गणेश चतुर्थी दूर्वाङ्कुर मन्त्र दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि॥
  • सिन्दूरम् दुर्वाङ्कुर समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को तिलक के लिये सिन्दूर समर्पित करें। गणेश चतुर्थी सिन्दूर मन्त्र सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। सिन्दूरं समर्पयामि॥

धूपः

सिन्दूर समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को धूप समर्पित करें।

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। धूपमाघ्रापयामि॥

दीप-समर्पणम्

धूप समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दीप समर्पित करें।

साज्यं त्रिवर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥ भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने। त्राहि मां नरकाद्घोराद्दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। दीपं दर्शयामि॥

नैवेद्य-समर्पणम् एवं करोद्वर्तन

दीप समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को नैवेद्य समर्पित करें।

नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु। ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम्॥ शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च। आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। नैवेद्यं मोदकमयऋतुफलानि च समर्पयामि॥

नैवेद्य समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को चन्दन युक्त जल समर्पित करें।

चन्दनं मलयोद्भूतं कस्तूर्यादि-समन्वितम्। करोद्वर्तनकं देव गृहाण परमेश्वर॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। चन्दनेन करोद्वर्तनं समर्पयामि॥

  • नैवेद्य-निवेदनम् दीप समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को नैवेद्य समर्पित करें। गणेश चतुर्थी नैवेद्य निवेदन मन्त्र नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु। ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम्॥ शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च। आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। नैवेद्यं मोदकमयऋतुफलानि च समर्पयामि॥
  • चन्दन-करोद्वर्तनम् नैवेद्य समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को चन्दन युक्त जल समर्पित करें। गणेश चतुर्थी चन्दन-करोद्वर्तन मन्त्र चन्दनं मलयोद्भूतं कस्तूर्यादि-समन्वितम्। करोद्वर्तनकं देव गृहाण परमेश्वर॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। चन्दनेन करोद्वर्तनं समर्पयामि॥

ताम्बूल-समर्पणम्, नारिकेल एवं दक्षिणा समर्पण

चन्दन करोद्वर्तन के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।

ॐ पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। एलाचूर्णादिसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मुख-वासार्थम्-एला-पूगी-फलादि-सहितं ताम्बूलं समर्पयामि॥

ताम्बूल समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को नारियल समर्पित करें।

इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव। तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। नारिकेल-फलं समर्पयामि॥

नारिकेल समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दक्षिणा समर्पित करें।

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः। अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। द्रव्य-दक्षिणां समर्पयामि॥

  • ताम्बूल-समर्पणम् चन्दन करोद्वर्तन के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें। गणेश चतुर्थी ताम्बूल मन्त्र ॐ पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। एलाचूर्णादिसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मुख-वासार्थम्-एला-पूगी-फलादि-सहितं ताम्बूलं समर्पयामि॥
  • नारिकेल-समर्पणम् ताम्बूल समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को नारियल समर्पित करें। गणेश चतुर्थी नारिकेल मन्त्र इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव। तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। नारिकेल-फलं समर्पयामि॥
  • दक्षिणा-समर्पणम् नारिकेल समर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को दक्षिणा समर्पित करें। गणेश चतुर्थी दक्षिणा मन्त्र हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः। अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। द्रव्य-दक्षिणां समर्पयामि॥

नीराजनम् एवं विसर्जनम्

निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ने के पश्चात् भगवान गणेश की आरती करें।

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्। आरार्तिक्यमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। कर्पूर-नीराजनं समर्पयामि॥

निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पुष्पाञ्जलि समर्पित करें।

नानासुगन्धि-पुष्पाणि यथा कालोद्भवानि च। पुष्पाञ्जलिं मया दत्तां गृहाण परमेश्वर॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मन्त्र-पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि॥

भगवान गणेश की प्रदक्षिणा (बाएँ से दाएँ ओर की परिक्रमा) के साथ निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये श्रीगणेश को फूल समर्पित करें।

यानि कानि च पापानि ज्ञाताज्ञातकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिणां पदे पदे॥

ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। प्रदक्षिणां समर्पयामि॥

दाहिने हाथ में अक्षत, पुष्प लेकर विसर्जन हेतु निम्नलिखित मन्त्र पढ़े।

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व गणेश्वर॥ अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम। तस्मात्कारुण्यभावेन रक्षस्व विघ्नेश्वर॥ गतं पापं गतं दुःखं गतं दारिद्र्यमेव च। आगता सुखसम्पत्तिः पुण्याच्च तव दर्शनात्॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥ यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्। तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर॥

  • नीराजन/आरती निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ने के पश्चात् भगवान गणेश की आरती करें। गणेश चतुर्थी नीराजन मन्त्र कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्। आरार्तिक्यमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। कर्पूर-नीराजनं समर्पयामि॥
  • पुष्पाञ्जलि-अर्पणम् निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुये भगवान गणेश को पुष्पाञ्जलि समर्पित करें। गणेश चतुर्थी पुष्पाञ्जलि मन्त्र नानासुगन्धि-पुष्पाणि यथा कालोद्भवानि च। पुष्पाञ्जलिं मया दत्तां गृहाण परमेश्वर॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। मन्त्र-पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि॥
  • प्रदक्षिणा भगवान गणेश की प्रदक्षिणा (बाएँ से दाएँ ओर की परिक्रमा) के साथ निम्नलिखित मन्त्र पढ़ते हुये श्रीगणेश को फूल समर्पित करें। गणेश चतुर्थी प्रदक्षिणा मन्त्र यानि कानि च पापानि ज्ञाताज्ञातकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिणां पदे पदे॥ ॐ सिद्धि-बुद्धि-सहिताय श्रीमहागणाधिपतये नमः। प्रदक्षिणां समर्पयामि॥
  • विसर्जनम् दाहिने हाथ में अक्षत, पुष्प लेकर विसर्जन हेतु निम्नलिखित मन्त्र पढ़े। गणेश चतुर्थी विसर्जन मन्त्र आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व गणेश्वर॥ अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम। तस्मात्कारुण्यभावेन रक्षस्व विघ्नेश्वर॥ गतं पापं गतं दुःखं गतं दारिद्र्यमेव च। आगता सुखसम्पत्तिः पुण्याच्च तव दर्शनात्॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥ यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्। तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर॥

गणेश चतुर्थी पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी पूजा विधि कब करनी चाहिए?
गणेश चतुर्थी पूजा विधि बुधवार, चतुर्थी तथा गणेश चतुर्थी जैसे अवसरों पर श्रद्धा के साथ की जा सकती है।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?
पूजा की सामग्री पूजा के प्रकार पर निर्भर करती है, लेकिन दीपक, जल, पुष्प, अक्षत, रोली और नैवेद्य जैसी मूल सामग्री सामान्यतः उपयोगी रहती है।
क्या गणेश चतुर्थी पूजा विधि घर पर की जा सकती है?
हाँ, गणेश चतुर्थी पूजा विधि को घर पर भी श्रद्धा, स्वच्छता और क्रमबद्ध विधि के साथ किया जा सकता है।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि के बाद क्या करना चाहिए?
पूजा पूर्ण होने के बाद प्रार्थना, आरती, प्रसाद वितरण और कुछ क्षण शांत बैठकर स्मरण करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी पूजा विधि को सामग्री, क्रम और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूजा अधिक व्यवस्थित, सहज और अर्थपूर्ण बनती है।

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