पूजा विधि
कुबेर पूजा विधि (Kuber Puja Vidhi in Hindi) - सामग्री, क्रम, मंत्र और संपूर्ण विधि
आपके पास श्री कुबेर की मूर्ति है तो वह पूजा में उपयोग की जा सकती है। यदि आपके पास कुबेर की मूर्ति नहीं है तो उसके स्थान पर आप तिजोरी या आभूषणों के बक्से को श्री कुबेर के रूप में मानिये तथा उसकी पूजा कीजिये। तिजोरी, बक्से आदि की पूजा से पूर्व सिन्दूर से स्वस्तिक-चिह्न बनाना चाहिये तथा उस पर 'मौली' बाँधना चाहिये।
इस पृष्ठ में सामग्री, मुख्य चरण, उपयोगी मंत्र और सावधानियाँ सरल रूप में दी गई हैं ताकि पाठक पूजा को व्यवस्थित तरीके से कर सके।
इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा दीपावली के अवसर पर किया जा सकता है।
यह पूजा-विधि भक्ति और शैक्षिक संदर्भ के लिए दी गई है। घर, कुल-परंपरा, क्षेत्र, गुरु-परंपरा या आचार्य के अनुसार सामग्री, क्रम, मंत्र या निषेध बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान, व्रत या विस्तृत कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।
विषय सूची
ध्यानम्
सर्व प्रथम निम्नलिखित मन्त्र द्वारा श्री कुबेर का ध्यान करें।
मनुज-बाह्य-विमान-स्थितम्, गरुड-रत्न-निभं निधि-नायकम्। शिव-सखं मुकुटादि-विभूषितम्, वर-गदे दधतं भजे तुन्दिलम्॥
मन्त्रार्थ - मानव-स्वरूप विमान पर विराजमान, श्रेष्ठ गरुड़ के समान सभी निधियों के स्वामी, भगवान् शिव के मित्र, मुकुट आदि से सुशोभित और हाथों में वर-मुद्रा एवं गदा धारण करने वाले भव्य श्रीकुबेर की मैं वन्दना करता हूँ।
आवाहनम्
भगवान् श्रीकुबेर का ध्यान करने के उपरान्त तिजोरी-बक्से आदि के सम्मुख आवाहन-मुद्रा प्रदर्शित करते हुये निम्नलिखित मन्त्र द्वारा उनका आवाहन करें।
आवाहयामि देव! त्वामिहायाहि कृपां कुरु। कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परि-रक्ष सुरेश्वर॥
॥श्रीकुबेर-देवम् आवाहयामि॥
मन्त्रार्थ - हे देव, सुरेश्वर! मैं आपका आवाहन करता हूँ। आप यहाँ पधारें, कृपा करें। सदा मेरे भण्डार की वृद्धि करें और रक्षा करें।
॥ मैं श्रीकुबेर देव का आवाहन करता हूँ ॥
पुष्पाञ्जलि-आसनम्
आवाहन करने के उपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये श्रीकुबेर देव के आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने, तिजोरी-बक्से आदि के निकट छोड़े।
नाना-रत्न-समायुक्तं कार्त्त-स्वर-विभूषितम्। आसनं देव-देवेश! प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥
॥श्रीकुबेर-देवाय आसनार्थे पञ्च-पुष्पाणि समर्पयामि॥
मन्त्रार्थ - हे देवताओं के ईश्वर! विविध प्रकार के रत्न से युक्त स्वर्ण-सज्जित आसन को प्रसन्नता हेतु ग्रहण करें।
॥ भगवान् श्रीकुबेर के आसन के लिये मैं पाँच पुष्प अर्पित करता हूँ ॥
नवोपचार-पूजनम्
तदुपरान्त चन्दन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य द्वारा भगवान् श्रीकुबेर का पूजन निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुये करें।
ॐ श्रीकुबेराय नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः शिरसि अर्घ्यं समर्पयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः गन्धाक्षतान् समर्पयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः पुष्पं समर्पयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः धूपम् आघ्रापयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः दीपं दर्शयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः नैवेद्यं निवेदयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः आचमनीयं समर्पयामि। ॐ श्रीकुबेराय नमः ताम्बूलं समर्पयामि।
पूजन-समर्पणम्
इस प्रकार पूजन करने के पश्चात् बायें हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प लेकर दाहिने हाथ द्वारा निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये 'तिजोरी-बक्से' आदि पर छोड़े।
ॐ श्रीकुबेराय नमः। अनेन पूजनेन श्रीधनाध्यक्षः श्रीकुबेरः प्रीयताम्। नमो नमः।
मन्त्रार्थ - श्रीकुबेर को नमस्कार! इस पूजन से श्रीकुबेर भगवान् प्रसन्न हों, उन्हें बारम्बार नमस्कार।
॥ इसी प्रकार श्री-कुबेर पूजा समाप्त हुयी ॥
कुबेर पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुबेर पूजा विधि कब करनी चाहिए?
कुबेर पूजा विधि के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?
क्या कुबेर पूजा विधि घर पर की जा सकती है?
कुबेर पूजा विधि के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
कुबेर पूजा विधि को सामग्री, क्रम और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूजा अधिक व्यवस्थित, सहज और अर्थपूर्ण बनती है।