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महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि (Maha Shivaratri Puja Vidhi in Hindi) - सामग्री, क्रम, मंत्र और संपूर्ण विधि

महा शिवरात्रि एवं भगवान शिव से सम्बन्धित अन्य प्रमुख अवसरों पर पौराणिक मन्त्रों के उच्चारण के सहित सभी सोलह अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव की पूजा की जाती है। सभी 16 अनुष्ठानों के द्वारा देवी-देवताओं का पूजन, षोडशोपचार पूजा के रूप में वर्णित किया जाता है।

इस पृष्ठ में सामग्री, मुख्य चरण, उपयोगी मंत्र और सावधानियाँ सरल रूप में दी गई हैं ताकि पाठक पूजा को व्यवस्थित तरीके से कर सके।

इसे विशेष रूप से सोमवार तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर किया जा सकता है।

पूजा विधि संदर्भ सूचना

यह पूजा-विधि भक्ति और शैक्षिक संदर्भ के लिए दी गई है। घर, कुल-परंपरा, क्षेत्र, गुरु-परंपरा या आचार्य के अनुसार सामग्री, क्रम, मंत्र या निषेध बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान, व्रत या विस्तृत कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।

विषय सूची

  1. ध्यानम्
  2. सङ्कल्पः
  3. आवाहनम्
  4. आसनम्
  5. पाद्यम्
  6. अर्घ्यम्
  7. आचमनीयम्
  8. स्नानम्
  9. वस्त्रम्
  10. यज्ञोपवीतम्
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  12. निष्कर्ष
  13. अन्य पूजा विधि

ध्यानम्

भगवान शिव का ध्यान करते हुये पूजन आरम्भ करना चाहिये। ध्यान शिव जी के चित्र अथवा मूर्ति के समक्ष करना चाहिये। भगवान शिव का ध्यान करते समय निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करना चाहिये।

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः ध्यानात् ध्यानं समर्पयामि।

सङ्कल्पः

भगवान शिव का ध्यान करने के उपरान्त मूर्ति के समक्ष निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये पूजन का सङ्कल्प लेना चाहिये।

ॐ तत्सत् अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय-प्रहरार्द्धे श्वेत-वराह-कल्पे जम्बू-द्वीपे भरत-खण्डे अमुक-प्रदेशे अमुक-पुण्य-क्षेत्रे कलियुगे कलि-प्रथम-चरणे अमुक-संवत्सरे अमुक-मासे अमुक-पक्षे अमुक-तिथौ अमुक-वासरे अमुक-गोत्रोत्पन्नो अमुक-नाम-अहं मम पापक्षयार्थम् अक्षयमोक्षभोगप्राप्त्यर्थं शिवरात्रिव्रतं करिष्ये।

आवाहनम्

सङ्कल्प लेने के उपरान्त मूर्ति के समक्ष दोनों हथेलियों को जोड़कर तथा दोनों अँगूठों को अन्दर की ओर मोड़कर आवाहन मुद्रा प्रदर्शित करते हुये निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करना चाहिये।

ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥

आगच्छ देवदेवेश मर्त्यलोकहितेच्छया। पूजयामि विधानेन प्रसन्नः सुमुखो भव॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः देवेशम् आवाहयामि।

आसनम्

भगवान शिव का आवाहन करने के पश्चात्, अञ्जलि (दोनों हाथों की हथेली को मिलाकर) में पाँच पुष्प लें तथा उन्हें निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये मूर्ति के समक्ष छोड़ दें तथा मन ही मन भगवान शिव से आसन ग्रहण करने का आग्रह करें।

पुरुष एवेदगं सर्वम् यद्भूतं यच्छ भव्यम्। उतामृतत्वस्येशानः यदन्नेनातिरोहति॥

सदासनं कुरु प्राज्ञ निर्मलं स्वर्णनिर्मितम्। भूषितं विविधै रत्नैः कुरु त्वं पादुकासनम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः आसनं कल्पयामि।

पाद्यम्

आसन अर्पित करने के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, शिव जी को चरण प्रक्षालन हेतु जल अर्पित करें।

एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्च पूरुषः। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥

गङ्गादिसर्वतीर्थेभ्यो मया प्रार्थनयाहृतम्। तोयमेतत्सुखस्पर्शं पाद्यार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः पाद्यं समर्पयामि।

अर्घ्यम्

पाद्य प्रक्षालन के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को अभिषेक हेतु जल अर्पित करें।

त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवात्पुनः। ततो विश्वङ्व्यक्रामत् साशनानशने अभि॥

गन्धोदकेन पुष्पेण चन्दनेन सुगन्धिना। अर्घ्यं गृहाण देवेश भक्तिं मे ह्यचलां कुरु॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।

तदुपरान्त भगवान शिव को प्रहर के अनुसार अर्घ्य दें। निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, प्रथम प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें।

नमः शिवाय शान्ताय सर्वपापहराय च। शिवरात्रौ मया दत्तं गृहाणार्घ्यं प्रसीद मे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः प्रथमप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।

प्रथम प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को द्वितीय प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें।

मया कृतान्यनेकानि पापानि हर शङ्कर। गृहाणार्घ्यम् उमाकान्त शिवरात्रौ प्रसीद मे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः द्वितीयप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।

द्वितीय प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को तृतीय प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें।

दुःखदारिद्र्यभावैश्च दग्धोऽहं पार्वतीपते। मां वै त्राहि महादेव गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः तृतीयप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।

तृतीय प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को चतुर्थ प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें।

किं न जानासि देवेश तावद्भक्तिं प्रयच्छ मे। स्वपादाग्रतले देव दास्यं देहि जगत्पते॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः चतुर्थप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।

  • षोडशोपचारान्तर्गत अर्घ्यम् पाद्य प्रक्षालन के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को अभिषेक हेतु जल अर्पित करें। श्री शिव अर्घ्य मन्त्र त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवात्पुनः। ततो विश्वङ्व्यक्रामत् साशनानशने अभि॥ गन्धोदकेन पुष्पेण चन्दनेन सुगन्धिना। अर्घ्यं गृहाण देवेश भक्तिं मे ह्यचलां कुरु॥ ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
  • अथ प्रहरानुसारम् अर्घ्यम् - प्रथमप्रहरे अर्घ्यम् तदुपरान्त भगवान शिव को प्रहर के अनुसार अर्घ्य दें। निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, प्रथम प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें। प्रथम प्रहर अर्घ्य मन्त्र नमः शिवाय शान्ताय सर्वपापहराय च। शिवरात्रौ मया दत्तं गृहाणार्घ्यं प्रसीद मे॥ ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः प्रथमप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।
  • द्वितीयप्रहरे अर्घ्यम् प्रथम प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को द्वितीय प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें। द्वितीय प्रहर अर्घ्य मन्त्र मया कृतान्यनेकानि पापानि हर शङ्कर। गृहाणार्घ्यम् उमाकान्त शिवरात्रौ प्रसीद मे॥ ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः द्वितीयप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।
  • तृतीयप्रहरे अर्घ्यम् द्वितीय प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को तृतीय प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें। तृतीय प्रहर अर्घ्य मन्त्र दुःखदारिद्र्यभावैश्च दग्धोऽहं पार्वतीपते। मां वै त्राहि महादेव गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥ ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः तृतीयप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।
  • चतुर्थप्रहरे अर्घ्यम् तृतीय प्रहर के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को चतुर्थ प्रहर का अर्घ्य अर्पित करें। चतुर्थ प्रहर अर्घ्य मन्त्र किं न जानासि देवेश तावद्भक्तिं प्रयच्छ मे। स्वपादाग्रतले देव दास्यं देहि जगत्पते॥ ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः चतुर्थप्रहरस्य अर्घ्यं समर्पयामि।

आचमनीयम्

अर्घ्य अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को आचमन हेतु जल अर्पित करें।

तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पूरुषः। स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः॥

कर्पूरोशीरसुरभि शीतलं विमलं जलम्। गङ्गायास्तु समानीतं गृहाणाचमनीयकम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः आचमनीयं समर्पयामि।

स्नानम्

आचमनीय अर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को स्नान हेतु जल अर्पित करें।

यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत। वसन्तो अस्यासीदाज्यम् ग्रीष्म इध्मश्शरद्धविः॥

मन्दाकिन्याः समानीतं हेमाम्भोरुहवासितम्। स्नानाय ते मया भक्त्या नीरं स्वीक्रियतां विभो॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः स्नानं समर्पयामि।

वस्त्रम्

स्नान अर्पण के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को नवीन वस्त्र अर्पित करें।

तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः। तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये॥

वस्त्रं सूक्ष्मं दुकूलं च देवानामपि दुर्लभम्। गृहाण त्वमुमाकान्त प्रसन्नो भव सर्वदा॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः वस्त्रं समर्पयामि।

यज्ञोपवीतम्

वस्त्र अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये श्री भगवान शिव को पवित्र सूत्र अर्पित करें।

तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यम्। पशूगँस्तागंश्चक्रे वायव्यान् आरण्यान् ग्राम्याश्च ये॥

यज्ञोपवीतं सहजं ब्रह्मणा निर्मितं पुरा। आयुष्यं ब्रह्मवर्चस्कम् उपवीतं गृहाण मे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि।

गन्धः

यज्ञोपवीत अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को चन्दन अर्पित करें।

तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे। छन्दाँसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्मादजायत॥

श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गंधाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपनं सुरश्रेष्ठ! चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः गन्धं समर्पयामि।

पुष्पाणि

चन्दन अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें।

तस्मादश्वा अजायन्त ये के चोभयादतः। गावो ह जज्ञिरे तस्मात् तस्माज्जाता अजावयः॥

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयाऽऽनीतानि पुष्पाणि गृहाण परमेश्वर॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः पुष्पाणि समर्पयामि।

धूपम्

पुष्प अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव को धूप अर्पित करें।

यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्। मुखं किमस्य कौ बाहू कावूरू पादावुच्येते॥

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्‌॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः धूपम् आघ्रापयामि।

दीपः

धूप अर्पण करने के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये, भगवान शिव के निमित्त शुद्ध घी का दीप प्रज्वलित कर अर्पित करें।

ब्राह्मणोस्य मुखमासीत् बाहू राजन्यः कृतः। ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रोऽजायत॥

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश! त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः दीपं दर्शयामि।

नैवेद्यम्

दीप अर्पित करने के उपरान्त हस्तप्रक्षालन करके प्रभु को नैवेद्य अर्पित करें। नैवेद्य में विभिन्न प्रकार के फल तथा मिष्ठान्न सम्मिलित कर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को अर्पित करना चाहिये।

ॐ चन्द्रमा मनसो जातः चक्षोः सूर्यो अजायत। मुखादिन्द्रश्चाग्निश्च प्राणाद्वायुरजायत॥

नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु। इप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम्॥ शर्कराखण्डखाद्यनि दधिक्षीरघृतानि च। आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः नैवेद्यं निवेदयामि।

ताम्बूलम्

नैवेद्यम् अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को ताम्बूल (पान-सुपारी) अर्पित करें।

पूगीफलं महद्‌दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्‌। ऐलाचूर्णादिसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्‌॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः ताम्बूलं समर्पयामि।

दक्षिणा

ताम्बूल अर्पण करने के पश्चात् निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को दक्षिणा अर्पित करें।

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः। अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः दक्षिणां समर्पयामि।

नीराजनम्

दक्षिणा अर्पित करने के उपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव की आरती एवं नीराजन करें।

चक्षुर्दं सर्वलोकानां तिमिरस्य निवारणम्। आर्तिक्यं कल्पितं भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः नीराजनं समर्पयामि।

फलम्

नीराजन करने के उपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को ऋतुफल अर्पित करें।

फलेन फलितं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्‌। तस्मात्‌ फलप्रदादेन पूर्णाः सन्तु मनोरथाः॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः फलं समर्पयामि।

प्रदक्षिणा

ऋतुफल अर्पित करने के उपरान्त पुष्पों सहित भगवान शिव की प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें।

नाभ्या आसीदन्तरिक्षम् शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत। पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात् तथा लोकाँ अकल्पयन्॥

यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यासमानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणे पदे पदे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि।

नमस्कारः

प्रदक्षिणा के उपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को नमस्कार करें।

सप्तास्यासन् परिधयः त्रिःसप्त समिधः कृताः। देवा यद्यज्ञं तन्वानाः अबध्नन्पुरुषं पशुम् । तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन्। पुरुषं जातमग्रतः॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर!। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः नमस्कारं समर्पयामि।

मन्त्रपुष्पाञ्जलिः

नमस्कार करने के उपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव को मन्त्र सहित पुष्प अर्पित करें।

यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नाकम् महिमानः सचन्ते यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥

ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्य मां भवोद्भवाय नमः॥

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।

प्रार्थना

मन्त्र पुष्पाञ्जलि अर्पण करने के उपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान शिव से प्रार्थना करें।

यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञक्रियादिषु। नूनं सम्पूर्णतां यातु सद्यो वन्देतमच्युतम्।

ॐ साङ्गाय सायुधाय साम्बसदाशिवाय नमः प्रार्थनां समर्पयामि।

महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि कब करनी चाहिए?
महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि सोमवार तथा महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर श्रद्धा के साथ की जा सकती है।
महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?
पूजा की सामग्री पूजा के प्रकार पर निर्भर करती है, लेकिन दीपक, जल, पुष्प, अक्षत, रोली और नैवेद्य जैसी मूल सामग्री सामान्यतः उपयोगी रहती है।
क्या महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि घर पर की जा सकती है?
हाँ, महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि को घर पर भी श्रद्धा, स्वच्छता और क्रमबद्ध विधि के साथ किया जा सकता है।
महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि के बाद क्या करना चाहिए?
पूजा पूर्ण होने के बाद प्रार्थना, आरती, प्रसाद वितरण और कुछ क्षण शांत बैठकर स्मरण करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

महा शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि को सामग्री, क्रम और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूजा अधिक व्यवस्थित, सहज और अर्थपूर्ण बनती है।

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