पूजा विधि
नरक चतुर्दशी पूजा विधि (Naraka Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi) - सामग्री, क्रम, मंत्र और संपूर्ण विधि
चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान सबसे महत्वपूर्ण है। अभ्यंग स्नान को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने वाले लोग नरक जाने से बच सकते हैं। अभ्यंग स्नान के दौरान उबटन के लिए तिल के तेल का उपयोग किया जाना चाहिये।
इस पृष्ठ में सामग्री, मुख्य चरण, उपयोगी मंत्र और सावधानियाँ सरल रूप में दी गई हैं ताकि पाठक पूजा को व्यवस्थित तरीके से कर सके।
इसे विशेष रूप से दैनिक पूजा तथा विशेष अवसर के अवसर पर किया जा सकता है।
यह पूजा-विधि भक्ति और शैक्षिक संदर्भ के लिए दी गई है। घर, कुल-परंपरा, क्षेत्र, गुरु-परंपरा या आचार्य के अनुसार सामग्री, क्रम, मंत्र या निषेध बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान, व्रत या विस्तृत कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।
विषय सूची
प्रार्थना
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रातःकाल 'अपामार्ग' और 'चकबक' को स्नान के समय मस्तक पर घुमाना चाहिये। इससे नरक के भय का नाश होता है। उस समय निम्न प्रकार से प्रार्थना करे-
हे अपामार्ग! मैं काँटों और पत्तों सहित तुम्हें अपने मस्तक पर बार-बार घुमा रहा हूँ। तुम मेरे पाप हर लो।
आवाहनं
स्नान के पश्चात् 'यम' के चौदह (14) नामों का तीन-तीन बार उच्चारण करके तर्पण (जल-दान) करना चाहिये। साथ ही 'श्री भीष्म' को तीन अञ्जलियाँ जल-दान देकर तर्पण करना चाहिये, यहाँ तक कि जिनके पिता जीवित हैं, उन्हें भी यह जल-अञ्जलियाँ देनी चाहिये। जल-अञ्जलि हेतु यमराज के निम्नलिखित 14 नामों का तीन बार उच्चारण करना चाहिये-
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को सायं-काल घर से बाहर नरक-निवृत्ति के लिए धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष-रुपी चार बत्तियों का दीपक यम-देवता के लिए सर्वप्रथम जलाना चाहिये। इसके पश्चात् गो-शाला, देव-वृक्षों के नीचे, रसोई-घर, स्नानागार आदि में दीप जलाये। इस प्रकार 'दीप-दान' के बाद नित्य का पूजन करे।
नरक चतुर्दशी पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी पूजा विधि कब करनी चाहिए?
नरक चतुर्दशी पूजा विधि के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?
क्या नरक चतुर्दशी पूजा विधि घर पर की जा सकती है?
नरक चतुर्दशी पूजा विधि के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
नरक चतुर्दशी पूजा विधि को सामग्री, क्रम और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूजा अधिक व्यवस्थित, सहज और अर्थपूर्ण बनती है।