पूजा विधि
वरलक्ष्मी पूजा विधि (Varalakshmi Puja Vidhi in Hindi) - सामग्री, क्रम, मंत्र और संपूर्ण विधि
यहाँ हम विस्तृत वरलक्ष्मी पूजा विधि प्रदान कर रहे हैं। प्रस्तुत पूजा विधि को द्वात्रिंश-उपचार वरलक्ष्मी पूजा के रूप में वर्णित किया गया है। हालाँकि, दी गयी पूजा विधि में देवी वरलक्ष्मी की पूजा के सभी सोलह चरण भी सम्मिलित हैं। धर्मग्रन्थों के अनुसार, जिस पूजा में सोलह चरण अर्थात् अनुष्ठान होते हैं, उसे षोडशोपचार पूजा कहा जाता है तथा जिस पूजा में बत्तीस चरण होते हैं, उसे द्वात्रिंशोपचार पूजा के रूप में जाना जाता है। द्वात्रिंशोपचार पूजा को बत्तीशोपचार पूजा के नाम से भी जाना जाता है। वरलक्ष्मी पूजा आरम्भ करने से पूर्व पूजा में उपयोग की जाने वाली सभी आवश्यक वस्तुओं को एकत्र कर लेना चाहिये। वरलक्ष्मी पूजा के लिये आवश्यक सभी वस्तुओं के संग्रह को वरलक्ष्मी पूजन सामग्री के रूप में जाना जाता है।
इस पृष्ठ में सामग्री, मुख्य चरण, उपयोगी मंत्र और सावधानियाँ सरल रूप में दी गई हैं ताकि पाठक पूजा को व्यवस्थित तरीके से कर सके।
इसे विशेष रूप से शुक्रवार तथा दीपावली के अवसर पर किया जा सकता है।
यह पूजा-विधि भक्ति और शैक्षिक संदर्भ के लिए दी गई है। घर, कुल-परंपरा, क्षेत्र, गुरु-परंपरा या आचार्य के अनुसार सामग्री, क्रम, मंत्र या निषेध बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान, व्रत या विस्तृत कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।
विषय सूची
ध्यानम्
पूजन का आरम्भ देवी श्री वरलक्ष्मी का ध्यान करते हुये करना चाहिये। आपके समक्ष पहले से ही स्थापित श्री वरलक्ष्मी प्रतिमा के समीप ध्यान करना चाहिये। श्री वरलक्ष्मी का ध्यान करते हुये निम्नलिखित मन्त्र का जाप करें।
क्षीरसागर-संभूतां क्षीरवर्ण-समप्रभाम्। क्षीरवर्णसमं वस्त्रं दधानां हरिवल्लभाम्॥
आवाहनम्
देवी श्री वरलक्ष्मी का ध्यान करने के पश्चात्, मूर्ति के सामने दोनों हथेलियों को जोड़कर तथा दोनों अँगूठों को अन्दर की ओर मोड़कर, आवाहन मुद्रा प्रदर्शित करते हुये निम्नलिखित मन्त्र का जाप करें।
ब्राह्मी हंससमारूढा धारिण्यक्षकमण्डलू। विष्णुतेजोऽधिका देवी सा मां पातु वरप्रदा॥
आसनम्
देवी श्री वरलक्ष्मी का आह्वान करने के पश्चात्, दोनों हाथों की हथेलियाँ जोड़कर, अञ्जलि में पाँच पुष्प लें एवं उन्हें मूर्ति के सामने छोड़ दें तथा निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये श्री वरलक्ष्मी को आसन प्रदान करें।
महेश्वरि महादेवि आसनं ते ददाम्यहम्। महैश्वर्यसमायुक्तं ब्रह्माणि ब्रह्मणः प्रिये॥
पाद्यम्
देवी श्री वरलक्ष्मी को आसन प्रदान करने के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये उनके चरण प्रक्षालन हेतु जल अर्पित करें।
कुमारशक्तिसम्पन्ने कौमारि शिखिवाहने। पाद्यं ददाम्यहं देवि वरदे वरलक्षणे॥
अर्घ्यम्
पाद्य अर्पण के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का जाप करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को शीर्ष अभिषेक हेतु जल अर्पित करें।
तीर्थोदकैर्महद्दिव्यैः पापसंहारकारकैः। अर्घ्यं गृहाण भो लक्ष्मि देवानामुपकारिणि॥
आचमनम्
अर्घ्य अर्पण के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को आचमन हेतु जल अर्पित करें।
वैष्णवि विष्णुसंयुक्ते असंख्यायुधधारिणि। आचम्यतां देवपूज्ये वरदेऽसुरमर्दिनि॥
पञ्चामृत-स्नानम्
स्नान के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को पञ्चामृत स्नान करायें।
पद्मे पञ्चामृतैः शुद्धैः स्नापयिष्ये हरिप्रिये। वरदे शक्ति-सम्भूते वरदेवि वरप्रिये॥
स्नानम्
पञ्चामृत स्नान के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को स्नान के लिये जल अर्पित करें।
गङ्गाजलं समानीतं सुगन्धिद्रव्यसंयुतम्। स्नानार्थं ते मया दत्तं गृहाण परमेश्वरि॥
वस्त्रम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को नवीन वस्त्र के रूप में मोली अर्पित करें।
रजताद्रिसमं दिव्यं क्षीरसागरसन्निभम्। चन्द्रप्रभासमं देवि वस्त्रं ते प्रददाम्यहम्॥
कण्ठ-सूत्रम्
वस्त्रार्पण के पश्चात्, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को हार अर्पित करें।
माङ्गल्यमणिसंयुक्तं मुक्ताफलसमन्वितम्। दत्तं मंगलसूत्रं ते गृहाण सुरवल्लभे॥
आभरणम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को आभूषण अर्पित करें।
सुवर्णभूषितं दिव्यं नानारत्नसुशोभितम्। त्रैलोक्यभूषिते देवि गृहाणाभरणं शुभम्॥
गन्ध-समर्पणम्
निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को चन्दन अर्पित करें।
रक्तगन्धं सुगन्धाढ्यमष्टगन्धसमन्वितम्। दास्यामि देवि वरदे लक्ष्मि देवि प्रसीद मे॥
सौभाग्य-द्रव्यम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को सौभाग्य द्रव्य के रूप में हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, काजल अर्पित करें।
हरिद्रां कुङ्कुमं चैव सिन्दूरं कज्जलान्वितम्। सौभाग्यद्रव्यसंयुक्तं गृहाण परमेश्वरि॥
पुष्प-समर्पणम्
निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें।
नानाविधानि पुष्पाणि नानावर्णयुतानि च। पुष्पाणि ते प्रयच्छामि भक्त्या देवि वरप्रदे॥
अङ्ग-पूजनम्
तदोपरान्त, उन देवताओं की पूजा करें जो देवी श्री वरलक्ष्मी के ही अङ्ग हैं। इसके लिये बायें हाथ में गन्ध, अक्षत एवं पुष्प लें एवं उन्हें दायें हाथ से श्री वरलक्ष्मी मूर्ति के पास छोड़ दें एवं निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करें।
ॐ वरलक्ष्म्यै नमः पादौ पूजयामि। ॐ कमलवासिन्यै नमः गुल्फौ पूजयामि। ॐ पद्मालयायै नमः जङ्घे पूजयामि। ॐ श्रियै नमः जानुनी पूजयामि। ॐ इन्दिरायै नमः ऊरू पूजयामि। ॐ हरिप्रियायै नमः नाभिं पूजयामि। ॐ लोकधात्र्यै नमः तनौ पूजयामि। ॐ विधात्र्ये नमः कण्ठं पूजयामि। ॐ धात्र्यै नमः नासां पूजयामि। ॐ सरस्वत्यै नमः मुखं पूजयामि। ॐ पद्मनिधये नमः नेत्रे पूजयामि। ॐ माङ्गल्यायै नमः कर्णौ पूजयामि। ॐ क्षीरसागरजायै नमः ललाटं पूजयामि। ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः शिरः पूजयामि। ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः सर्वाङ्गं पूजयामि॥
धूपः
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को धूप अर्पित करें।
धूपं दास्यामि ते देवि गोघृतेन समन्वितम्। प्रतिगृह्ण महादेवि भक्तानां वरदप्रिये॥
दीपः
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को दीप अर्पित करें।
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेशि त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥
नैवेद्यम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को नैवेद्य अर्पित करें।
नैवेद्यं परमं दिव्यं दृष्टिप्रीतिकरं शुभम्। भक्ष्यभोज्यादिसंयुक्तं परमान्नादिसंयुतम्॥
ताम्बूलम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को ताम्बूल (पान एवं सुपारी) अर्पित करें।
नागवल्लीदलैर्युक्तं चूर्णक्रमुकसंयुतम्। वरलक्ष्मि गृहाण त्वं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥
दक्षिणा
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को दक्षिणा (उपहार) अर्पित करें।
सुवर्णं सर्वधातूनां श्रेष्ठं देवि च तत्सदा। भक्त्या ददामि वरदे स्वर्णवृष्टिं च देहि मे॥
नीराजनम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को नीराजन (आरती) अर्पित करें।
नीराजनं सुमङ्गल्यं कर्पूरेण समन्वितम्। चन्द्रार्कवह्निसदृशं गृह्ण देवि नमोऽस्तु ते॥
दोरक-ग्रहणम्
तदोपरान्त, भक्त को निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये दोरक (पवित्र धागा) स्वीकार करना चाहिये।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये सर्वपापप्रणाशिनि। दोरकं प्रतिगृह्णामि सुप्रीता हरिवल्लभे॥
दोरक-बन्धनम्
दोरकग्रहण के पश्चात्, भक्त को निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये हाथ पर दोरक (पवित्र धागा) बाँधना चाहिये।
करिष्यामि व्रतं देवि त्वद्भक्तस्त्वत्परायणः। श्रियं देहि यशो देहि सौभाग्यं देहि मे शुभे॥
पुनरर्घ्यम्
दोरकबन्धन, के पश्चात्, पुनः देवी श्री वरलक्ष्मी को शीर्ष अभिषेक हेतु निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये जल अर्पित करें।
क्षीरार्णवसुते लक्ष्मि चन्द्रस्य च सहोदरि। गृहाणार्घ्यं महालक्ष्मि देवि तुभ्यं नमोऽस्तु ते॥
बिल्व-पत्रम्
निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को बिल्वपत्र अर्पित करें।
श्रीवृक्षस्य दलं देवि महादेवप्रियं सदा। बिल्वपत्रं प्रयच्छामि पवित्रं ते सुनिर्मलम्॥
प्रदक्षिणा
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का जाप करते हुये पुष्पों से प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा, अर्थात् श्री वरलक्ष्मी के बायें से दायें की ओर परिक्रमा करें।
इह जन्मनि यत्पापं मम जन्मान्तरेषु च। निवारय महादेवि लक्ष्मि नारायणप्रिये॥
नमस्कारः
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को प्रणाम करें।
कामोदरि नमस्तेऽस्तु नमस्त्रैलोक्यनायिके। हरिकान्ते नमस्तेऽस्तु त्राहि मां दुःखसागरात्॥
व्रत-समर्पणम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को व्रत समर्पण करें।
क्षीरार्णवसमुद्भूते कमले कमलालये। प्रयच्छ सर्वकामांश्च विष्णुवक्षःस्थलालये॥
क्षमार्पणम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये पूजा के समय हुयी किसी भी ज्ञात-अज्ञात त्रुटि के लिये श्री वरलक्ष्मी से क्षमा याचना करें।
छत्रं चामरमान्दोलं दत्त्वा व्यजनदर्पणे। गीतवादित्रनृत्यैश्च राजसम्माननैस्तथा। क्षमापये सूपचारैः समभ्यर्च्य महेश्वरीम्॥ यन्मया च कृतं देवि परिपूर्णं कुरुष्व तत्॥
प्रार्थना
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी से प्रार्थना करें।
वरलक्ष्मि महादेवि सर्वकाम-प्रदायिनि। यन्मया च कृतं देवि परिपूर्णं कुरुष्व तत्॥
वायनम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का जाप करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी को मिष्टान्न का भोग लगायें।
एकविंशतिपक्वान्नशर्कराघृतसंयुतम्। वायनं ते प्रयच्छामि इन्दिरा प्रीयतामिति। इन्दिरा प्रतिगृह्णाति इन्दिरा वै ददाति च। इन्दिरा तारकोभाभ्यामिन्दिरायै नमो नमः॥
पूजा-समर्पणम्
तदोपरान्त, निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये देवी श्री वरलक्ष्मी पूजा सम्पन्न करें।
पञ्च वायनकानेवं दद्याद्दक्षिणया युतान्। विप्राय चाथ यतये देव्यै तु ब्रह्मचारिणे। सुवासिन्यै ततस्त्वेकं दापयेच्च यथाविधि॥
वरलक्ष्मी पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वरलक्ष्मी पूजा विधि कब करनी चाहिए?
वरलक्ष्मी पूजा विधि के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?
क्या वरलक्ष्मी पूजा विधि घर पर की जा सकती है?
वरलक्ष्मी पूजा विधि के बाद क्या करना चाहिए?
निष्कर्ष
वरलक्ष्मी पूजा विधि को सामग्री, क्रम और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूजा अधिक व्यवस्थित, सहज और अर्थपूर्ण बनती है।